आजमगढ़। जनपद के प्रतिष्ठित शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं परीक्षा फॉर्म न भर पाने के विरोध में लामबंद हो गए। मामला बैक पेपर और सेमेस्टर परीक्षा के फॉर्म भरने से जुड़ा है, जिसमें तकनीकी या प्रशासनिक दिक्कतों के चलते सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय की कथित लचर व्यवस्था के कारण वे अपना बैक पेपर और सेमेस्टर परीक्षा का फॉर्म समय पर नहीं भर पा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पोर्टल और अन्य तकनीकी समस्याओं को लेकर उन्होंने कई बार गुहार लगाई, लेकिन जब समाधान नहीं हुआ तो उनका धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित छात्र कॉलेज परिसर में ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
देर शाम तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा:
जैसे-जैसे सूरज ढला, छात्रों का गुस्सा और बढ़ता गया। देर शाम तक छात्र कॉलेज परिसर में डटे रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रही छात्राओं और छात्रों से वार्ता की और उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराने की कोशिश की। छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक फॉर्म भरने की बाधाएं दूर नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
भविष्य पर मंडरा रहा है खतरा:
परीक्षा की तारीखें नजदीक हैं और ऐसे में फॉर्म न भर पाना छात्रों के लिए मानसिक तनाव का कारण बना हुआ है। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है, जिससे उनका एक साल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। फिलहाल, परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और छात्र अगले कदम की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
आजमगढ़ टाइम्स की राय: शिक्षण संस्थानों को तकनीक और प्रशासन के बीच ऐसा तालमेल बिठाना चाहिए कि किसी भी छात्र का भविष्य केवल एक ‘फॉर्म’ की वजह से दांव पर न लगे।
पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि कॉलेजों की तकनीकी खामियों के लिए सीधे तौर पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में दें।
