Sat, Nov 7, 2026 Updated 09:34 AM IST
अपना इलाका

आजमगढ़ में सील अस्पताल में मासूम की मौत पर मचा बवाल! सड़क पर शव रखकर धरने पर बैठे परिजन, स्वास्थ्य विभाग पर उठे संगीन सवाल

2 weeks पहले

आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। जिले के लालगंज क्षेत्र में स्वास्थ्य महकमे की कथित अनदेखी और निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देवगांव कोतवाली क्षेत्र के कटघर स्थित गीता चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। मासूम की जान जाने के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के सामने नवजात का शव रखकर जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंभीरपुर थाना क्षेत्र के कटघर रोहुआ जलालपुर गांव के निवासी संजय की पत्नी अर्चना ने तीन दिन पूर्व लालगंज स्थित आसमा हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के बाद नवजात की तबीयत अचानक खराब होने लगी, जिसके बाद उसे कटघर स्थित गीता चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर घोर लापरवाही बरती गई और कथित तौर पर गलत दवा देने के कारण मासूम की हालत बिगड़ती चली गई।

परिजनों का कहना है कि जब स्थिति बेकाबू हो गई, तो अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में बच्चे को जौनपुर के लिए रेफर कर दिया। परिजन बच्चे को लेकर जौनपुर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उग्र परिजन शव को वापस लाकर गीता चाइल्ड केयर हॉस्पिटल के मुख्य द्वार पर बैठ गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।

प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि इस अस्पताल को पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा सीज (Seal) किया गया था। लेकिन इसके बावजूद यह अस्पताल दोबारा बेखौफ तरीके से संचालित होने लगा। क्षेत्र में कथित रूप से चल रहे फर्जी अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की लचर निगरानी को लेकर भी स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची देवगांव कोतवाली पुलिस ने स्थिति को संभाला और नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आजमगढ़ टाइम्स की जन-अदालत: सील होने के बाद भी दोबारा खुल जाने वाले ऐसे निजी अस्पतालों पर आखिर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान क्यों है? क्या मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले ऐसे अस्पतालों पर तुरंत बुलडोजर जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!

ऐप खोलें