आजमगढ़। जनपद के अहरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत आलमपुर गांव में मंगलवार की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भक्तिमय माहौल में आयोजित एक भंडारा अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। दो पक्षों के बीच शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते ईंट-पत्थरबाजी और संघर्ष में बदल गया। इस झड़प में दोनों पक्षों के कुल 11 लोग लहूलुहान हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में पुलिस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अहरौला पहुंचाया गया।मिली जानकारी के अनुसार, भंडारे का आयोजन गांव के ही नारद चौहान के आवास पर किया गया था। आरोप है कि विवाद के दौरान उपद्रवियों ने घर पर पथराव किया, जिससे खिड़कियों के शीशे टूट गए। पीड़ित पक्ष ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस हमले के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा कथित तौर पर खंडित हो गई है। इतना ही नहीं, नारद चौहान ने यह भी दावा किया है कि इस पत्थरबाजी की चपेट में आने से उनके महज 26 दिन के मासूम बच्चे को भी चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना से पहले भी धमकी मिलने की शिकायत की गई थी।घटना के बाद तनाव की आंच अस्पताल तक भी पहुंच गई, जहाँ घायलों के समर्थकों की भीड़ जुटने से स्थिति संवेदनशील हो गई, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाला। गांव में व्याप्त भारी तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बुधवार की शाम करीब 3:30 बजे, पुलिस के कड़े पहरे के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा को तमसा नदी में विसर्जित कराया गया।मीडिया से बातचीत में थानाध्यक्ष रामकिशोर शर्मा ने बताया कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पाठकों से सवाल: धार्मिक आयोजनों और भंडारों में इस तरह की हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन और आयोजन समितियों को क्या कदम उठाने चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करें।आजमगढ़ में भंडारे के दौरान खूनी संघर्ष: 11 लोग घायल, मां दुर्गा की प्रतिमा खंडित होने के आरोप से आलमपुर में भारी तनाव!
2 weeks पहले
