आजमगढ़ टाइम्स। तहबरपुर थाना क्षेत्र के चिरावल गांव में डी-फार्मा के छात्र शिवम पाल की सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत के बाद मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। पीड़ित परिवार के लिए न्याय की आवाज उठा रहे स्थानीय युवाओं पर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज किए जाने के बाद अब किसान संगठनों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन के बैनर तले किसान नेता राजीव यादव की अगुवाई में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीणों और युवाओं पर दर्ज किए गए सभी मुकदमों को अविलंब वापस लेने की मांग उठाई।
किसान नेता राजीव यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस अपनी कथित लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए बेकसूर युवाओं पर गंभीर धाराओं में झूठी एफआईआर दर्ज कर रही है। उन्होंने दावा किया कि चिरावल, मेढ़ी, सरदहां और रैसिंहपुर समेत कई आसपास के गांवों में पुलिस देर रात छापेमारी कर रही है, जिससे महिलाओं और बच्चों में दहशत का माहौल है। लगातार पुलिसिया दबिश की वजह से गांवों में खेती-किसानी का काम भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
किसान संगठनों ने प्रशासन के सामने प्रमुख मांगे रखी हैं, जिसमें मृतक छात्र शिवम पाल के बेबस परिवार को ₹50 लाख का आर्थिक मुआवजा देने और दुर्घटना में घायल नितिन यादव का मुफ्त इलाज कराने की मांग शामिल है। बता दें कि मृतक शिवम अपने परिवार का इकलौता सहारा था; उसके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां गंभीर रूप से बीमार रहती हैं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि गांवों में छापेमारी नहीं रुकी और मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आजमगढ़ टाइम्स की जनता से अपील/सवाल: क्या सड़क हादसे में जान गंवाने वाले छात्र के लिए न्याय मांग रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करना जायज है? इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? कमेंट करके जरूर बताएं।
