आजमगढ़ (कप्तानगंज/सगड़ी)। जिले के उसुडकुडवा गांव में विकास कार्यों का शंखनाद करते हुए स्थानीय विधायक डॉ. संग्राम यादव ने सत्तापक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी नवनिर्मित सीसी रोड का लोकार्पण करने पहुंचे विधायक ने एक अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उन्होंने गांव की ही बेटियों से फीता कटवाकर इस सड़क का उद्घाटन करवाया। हालांकि, विकास का यह मंच जल्द ही सियासी गर्माहट का केंद्र बन गया, जहाँ विधायक ने लोकतंत्र और मताधिकार के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. संग्राम यादव ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने बेहद कड़े और तल्ख लहजे में कहा कि आम जनता को उनके सबसे बड़े संवैधानिक अधिकार—’वोट देने के हक’ से वंचित करने की कथित कोशिशें की जा रही हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने प्राथमिक विद्यालयों की बदहाली पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग ही अपनी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते दिखें, तो व्यवस्था की नाकामी खुद-ब-खुद उजागर हो जाती है। उन्होंने साफ किया कि जनता के अधिकारों के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व ब्लॉक प्रमुख महेंद्र यादव ने साल 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक बिसात बिछाते हुए जनता से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं और इसके खिलाफ अब बड़े संघर्ष का समय आ गया है। इस भव्य कार्यक्रम का संचालन बलवंत यादव ने किया, जबकि आयोजक महेंद्र यादव ने आए हुए सभी अतिथियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।
समारोह के दौरान क्षेत्र की कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें मुख्य रूप से पूर्व प्रधान रणविजय यादव, सीता राम कांदु, महाराजगंज के पूर्व चेयरमैन तेजई यादव, गोरेलाल जायसवाल, पूर्व प्रधान उमेश राजभर, सभासद रुपेश यादव, अखिलेश यादव, केदार यादव, उदयी यादव, हर-हर महादेव, हरिलाल राजभर, कन्हैया गौड़, बोली यादव, रमेश प्रजापति, अशोक राम, राजेंद्र राम, मुन्ना यादव, अरविंद प्रजापति, लछिराम वर्मा, गरीब, सिकंदर राजभर और श्रवण यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
‘आजमगढ़ टाइम्स’ का सवाल: विधायक संग्राम यादव द्वारा मताधिकार और प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गए इन सवालों से आप कितने सहमत हैं? क्या सचमुच बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए जनता को एकजुट होना पड़ेगा? अपनी निष्पक्ष राय नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर लिखें!
