आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स): जिले के मातबरगंज इलाके में आज स्वास्थ्य के प्रति सजगता का एक बड़ा संदेश दिया गया। 3 नवंबर 2026 को ‘नेशनल फार्मेसी वीक’ के विशेष अवसर पर एक भव्य जागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को दवाओं के सही इस्तेमाल और उनके संभावित खतरों के प्रति सचेत करना था।
रैली के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों और फार्मासिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा लेना (Self-Medication) जानलेवा साबित हो सकता है। विशेष रूप से एंटीबायोटिक दवाओं के गलत और अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की अनियंत्रित खुराक न केवल शरीर पर दुष्प्रभाव डालती है, बल्कि भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज को भी बेअसर बना सकती है।
आजमगढ़ टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में फार्मासिस्टों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। लोगों को बताया गया कि दवा लेते समय फार्मासिस्ट से उसके सही डोज और साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी लेना कितना अनिवार्य है। रैली में शामिल युवाओं और स्वास्थ्य कर्मियों ने स्लोगन के जरिए संदेश दिया कि “बीमारी होने पर खुद डॉक्टर न बनें, बल्कि विशेषज्ञ की सलाह पर ही दवा लें।”
इस कार्यक्रम का समापन लोगों को एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और दवाओं के प्रति जिम्मेदार रवैया रखने की शपथ के साथ हुआ। आयोजन का मूल मकसद समाज को दवा के ‘उपयोग’ और ‘दुरुपयोग’ के बीच के बारीक अंतर को समझाना था, ताकि एक स्वस्थ आजमगढ़ का निर्माण हो सके।
आजमगढ़ टाइम्स की अपील: क्या आप भी छोटी-मोटी बीमारी होने पर बिना डॉक्टर को दिखाए सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते हैं? क्या आपको लगता है कि एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति हम लोग लापरवाह हो रहे हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
