आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। जिले के लालगंज स्थित गीता चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में कथित तौर पर इलाज में लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की जान जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। परिजनों के भारी हंगामे और प्रदर्शन के बाद एक्शन में आई विभागीय टीम ने जांच के दौरान अस्पताल को अवैध और मानकों के खिलाफ पाते हुए तुरंत प्रभाव से सील कर दिया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डाक्टर एनआर वर्मा के निर्देशों पर जब स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर जांच के लिए पहुंची, तो अस्पताल की एक-एक कर पोल खुलती चली गई। जांच में पाया गया कि यह अस्पताल बिना किसी वैध पंजीकरण (Registration) के ही धड़ल्ले से चलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, एनआईसीयू (NICU) में भी चिकित्सा संबंधी सरकारी मानकों की सरेआम अनदेखी की जा रही थी और बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण में भी भारी गड़बड़ी मिली। पूरी जांच की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए टीम ने मौके पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई।
पहले भी सील हुआ था अस्पताल, टीम देखते ही फरार हुए संचालक
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अस्पताल को पूर्व में भी अनियमितताओं के चलते सीज किया जा चुका था। इसके बावजूद बेखौफ होकर दोबारा इसका संचालन शुरू कर दिया गया। निरीक्षण के वक्त अस्पताल संचालक और वहां मौजूद कर्मचारी अपनी या अपने स्टाफ की कोई भी वैध चिकित्सीय योग्यता संबंधी दस्तावेज नहीं दिखा सके। जैसे ही विभागीय टीम अस्पताल परिसर में दाखिल हुई, संचालक और कर्मचारी मौका देखकर फरार हो गए।
सड़क जाम के बाद हरकत में आया विभाग
गौरतलब है कि बीते बुधवार को कथित रूप से इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई थी, जिसके बाद आक्रोशित परिजनों ने सड़क जाम कर जमकर प्रदर्शन किया था। परिजनों के आक्रोश और आरोपों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मामले में त्वरित जांच बैठाई और यह सख्त कदम उठाया।
सीएमओ की सीधी चेतावनी, शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
सीएमओ डॉक्टर एनआर वर्मा ने साफ लहजे में कहा है कि आजमगढ़ में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना मानक के चलने वाले किसी भी अस्पताल या क्लीनिक को बख्शा नहीं जाएगा। सभी संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं। उक्त अस्पताल के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी और वैधानिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
आजमगढ़ टाइम्स की जनता से राय:
सवाल: सील होने के बाद भी दोबारा अवैध रूप से अस्पताल खुल जाना सीधे-सीधे नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ है। ऐसे फर्जी और गैर-कानूनी अस्पतालों तथा उनके संचालकों पर पुलिस प्रशासन को क्या सीधी जेल भेजने जैसी कार्रवाई करनी चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।
