Sun, Nov 8, 2026 Updated 06:36 AM IST
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पल्थी के दंगल में गूंजी तालियां: नीबी के सुजीत ने वाराणसी के पहलवान को चटाई धूल, 12 हजार का इनाम जीत बने “दंगल किंग”

1 hour पहले

आजमगढ़। फूलपुर तहसील के पल्थी बाजार में दो दिनों से सजी मेले की रौनक शनिवार को “दंगल” के जबरदस्त रोमांच के साथ संपन्न हुई। मेले के दूसरे दिन रामलीला समिति द्वारा आयोजित इस कुश्ती प्रतियोगिता में पूर्वांचल के दिग्गजों ने अपना दमखम दिखाया, जिसे देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचलों में आज भी कुश्ती को लेकर भारी जुनून है।

इस महामुकाबले में आजमगढ़, मऊ, प्रयागराज, महाराजगंज, गोरखपुर और जौनपुर जैसे जिलों के सैकड़ों पहलवानों ने हिस्सा लिया। अखाड़े में पूरे दिन मिट्टी की सौंधी खुशबू और पहलवानों के दांव-पेंच का शोर गूंजता रहा। जानकारी के मुताबिक, पूरे दिन में कुल 51 जोड़ी कुश्तियां लड़ी गईं। इस बार के दंगल में आजमगढ़ के नीबी और जौनपुर के केराकत के पहलवानों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला।

दिन की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित कुश्ती 12 हजार रुपए के नकद इनाम के लिए लड़ी गई। यह मुकाबला आजमगढ़ के नीबी निवासी सुजीत और वाराणसी के आकाश के बीच हुआ। दोनों ही पहलवानों ने एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए जी-जान लगा दी, लेकिन अंत में सुजीत ने अपनी फुर्ती और बेहतरीन तकनीक से आकाश को चित कर दिया और फाइनल मुकाबला जीत लिया। समिति और स्थानीय गणमान्य लोगों ने विजेता पहलवानों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पूरे मैच के दौरान तिजू सेठ ने रेफरी की अहम भूमिका निभाई।

मेले में केवल खेल ही नहीं, बल्कि उत्सव का भी माहौल था। तिघरा, चरौवा, बिहटा, दरियापुर, डीहपुर, गुवाई, मीरअहमदपुर, सरावां, गद्दोपुर, हड़वां, समुंद्रपुर और खदरा जैसे दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पहुंचे थे। बच्चों और महिलाओं ने झूला, चरखी और आर्केस्ट्रा का भरपूर आनंद लिया। इसके अलावा चाट-फुल्की, जलेबी और खिलौनों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी गई।

सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। दीदारगंज थानाध्यक्ष जय प्रकाश यादव, हल्का प्रभारी एसआई रमेश चन्द्र यादव और एसआई नन्दजी सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे। वहीं, रामलीला समिति के अध्यक्ष नन्दलाल मौर्य अपनी टीम के साथ व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में जुटे रहे।

पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि ग्रामीण इलाकों में होने वाले ऐसे दंगल के आयोजनों से हमारी पारंपरिक कुश्ती और नए पहलवानों को सही मंच मिल पा रहा है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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