आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा (343) के ग्रामसभा शेखौना सेनपुर पहुंचे कैबिनेट मंत्री ने सपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव में राजनीतिक हिम्मत है, तो वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके दिखाएं।
रविवार को अतरौलिया के शेखौना सेनपुर गांव स्थित फिरोज अहमद के आवास पर प्रबुद्धजनों से मुलाकात के दौरान ओपी राजभर ने सपा पर अल्पसंख्यकों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुस्लिम समाज के समर्थन के दम पर सपा ने चार बार सरकार बनाई, लेकिन जब नेतृत्व की बात आई तो कुर्सी हमेशा अपने ही परिवार और जाति तक सीमित रखी। मंत्री ने दावा किया कि आजादी के समय सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 38 प्रतिशत थी, जो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के दौर में घटकर 1 प्रतिशत से भी कम रह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल की भर्तियों में केवल एक विशेष जाति को ही प्राथमिकता दी गई।
अति-पिछड़ों के हक और आरक्षण के बंटवारे पर घेरा
सामाजिक न्याय का जिक्र करते हुए सुभासपा अध्यक्ष ने कहा कि सपा नेता सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के त्रिस्तरीय बंटवारे पर बोलने से कतराते हैं। उन्होंने दावा किया कि अति-पिछड़ी जातियों को उनका वाजिब हक दिलाने के मुद्दे पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सकारात्मक बातचीत हुई है। जातीय गणना के आधार पर हर वर्ग को उसका अधिकार मिलना तय है।
“ईवीएम पर शक है तो 37 सांसद दें इस्तीफा”
ईवीएम पर विपक्ष के बयानों को ढोंग बताते हुए राजभर ने कहा कि जब विपक्ष जीतता है तो ईवीएम ठीक रहती है, लेकिन हार मिलते ही मशीन पर दोष मढ़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव को चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो हालिया लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से जीते सपा के 37 सांसदों को अपने पदों से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। राजभर ने अखिलेश यादव को अपने खिलाफ जहूराबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का खुला चैलेंज भी दे डाला।
निकाय व पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के सवाल पर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय के सभी निर्देशों का पालन कर रही है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आते ही नियमानुसार और तय समय पर चुनाव कराए जाएंगे।
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