आजमगढ़ (पवई): ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की तरक्की की रीढ़ कहे जाने वाले मवेशियों की सेहत को लेकर पशुपालन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। फूलपुर विकासखंड के बूढ़ापुर बदल गांव में आयोजित विशाल पशु चिकित्सा शिविर में डॉक्टरों की टीम ने रिकॉर्ड 530 पशुओं का इलाज किया और पशुपालकों को मुफ्त दवाएं बांटीं। इस विशेष शिविर का औपचारिक उद्घाटन मंडल अध्यक्ष रत्नेश बिन्द द्वारा किया गया।
शिविर के दौरान पहुंचे फूलपुर के उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. अनिल ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की बारीकियां समझाईं और उनका शत-प्रतिशत लाभ उठाने का आह्वान किया। वहीं, पशुचिकित्साधिकारी डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने मवेशियों में होने वाली गंभीर बीमारियों, उनके शुरुआती लक्षणों और त्वरित प्राथमिक उपचार के तरीकों पर प्रकाश डाला। डॉ. पालीवाल ने साफ शब्दों में कहा कि पशुओं के संतुलित खानपान, बाड़े की नियमित सफाई और समय पर टीकाकरण से ही बीमारियों को दरवाजे से बाहर रखा जा सकता है।
कार्यक्रम में मार्टिनगंज के पशुचिकित्साधिकारी डॉ. अजय श्रीवास्तव ने पशुओं की ‘टैगिंग’ (ईयर टैगिंग) को अनिवार्य बताते हुए इसके फायदे गिनाए। उन्होंने कहा कि टैगिंग से न सिर्फ मवेशियों की विशिष्ट पहचान होती है, बल्कि सरकारी अनुदान, बीमा और आपातकालीन मुआवजा पाने में भी यह बेहद कारगर साबित होती है। शिविर में विशिष्ट अतिथि मो. शेख गुलज़ार, जिला ग्राम प्रधान बीरेंद्र यादव ‘भूषण’ समेत विभाग के तमाम अधिकारी और कर्मचारी मुस्तैद रहे। इस पूरे आयोजन की मुख्य प्राथमिकता पशुधन को रोगमुक्त बनाना और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी दर्ज कराना था।
आजमगढ़ टाइम्स की चौपाल: क्या आपके क्षेत्र या गांव में भी पशुपालन विभाग द्वारा ऐसे मुफ्त चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है? क्या आपको पशुओं की टैगिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर मिल पा रहा है? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें!
