आजमगढ़। जनपद में एमएलसी (MLC) चुनाव के मद्देनजर प्रशासन द्वारा लागू की गई शराबबंदी के बीच मुनाफाखोरी का एक बड़ा खेल सामने आया है। मुबारकपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बोरी में भरकर अवैध रूप से शराब बेचने जा रहे दो सेल्समैनों को रंगे हाथ धर दबोचा। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से देशी शराब के 51 टेट्रा पैक, नकदी और परिवहन में इस्तेमाल की जा रही बाइक बरामद की है।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर दबोचा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर को मुबारकपुर चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेंद्र शर्मा अपनी पुलिस टीम के साथ इलाके में संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक बाइक से अवैध देशी शराब की खेप लेकर जा रहे हैं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बावन बीघा मैदान, शहीदनगर इस्लामपुरा के पास घेराबंदी की और बाइक सवार दोनों संदिग्धों को रोक लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से 51 टेट्रा पैक देशी शराब और 520 रुपये नकद बरामद हुए।
रोडवेज स्थित दुकान से उठाई थी खेप, महंगे दामों में बेचने की थी तैयारी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय चौहान (36) और प्रेमचंद (30), निवासी ग्राम प्यारेपुर के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे शराब की दुकान पर सेल्समैन का काम करते हैं। आरोप है कि एमएलसी चुनाव के कारण आधिकारिक तौर पर दुकानें बंद थीं, जिसका फायदा उठाकर वे रोडवेज स्थित देशी शराब की दुकान से शराब की खेप निकाल लाए थे। दोनों कथित तौर पर इसे बोरी में छिपाकर बम्हौर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में औने-पौने और महंगे दामों पर बेचने जा रहे थे, जिससे होने वाले अवैध मुनाफे को वे आपस में बांटने वाले थे।
एक आरोपी का पहले भी रहा है आपराधिक इतिहास
पुलिस रिकॉर्ड की जांच में सामने आया है कि आरोपी संजय चौहान पर पहले भी अवैध शराब के कारोबार में लिप्त रहने का आरोप है। वर्ष 2021 में उसके खिलाफ जीयनपुर थाने में आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुकदमा दर्ज, ठेके की भूमिका भी जांच के दायरे में
मुबारकपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 376/2026 के तहत आबकारी अधिनियम की धारा 60/63 में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई पूरी कर ली है। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन अब रोडवेज स्थित देशी शराब की दुकान के संचालक और स्टॉक की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रहा है कि चुनाव के दौरान सील या बंद दुकानों से शराब बाहर कैसे आई।
पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि चुनावों के दौरान शराबबंदी के नियमों को धता बताने वाले ऐसे सेल्समैनों और ठेका संचालकों के लाइसेंस पूरी तरह निरस्त कर देने चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
