Sat, Nov 7, 2026 Updated 05:01 PM IST
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19 साल बाद टूटेगा सन्नाटा! आजमगढ़ के चर्चित रुदरी दोहरे हत्याकांड में फैसला सुरक्षित, ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत कई दिग्गजों पर टिकीं निगाहें

2 weeks पहले

आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। पूर्वांचल के सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल रुदरी दोहरे हत्याकांड में करीब 19 साल के लंबे इंतजार के बाद अब इंसाफ की घड़ी बेहद करीब आ पहुंची है। आजमगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों पक्षों की तीखी दलीलों, गवाहों के बयानों और सबूतों की गहन समीक्षा के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मुकदमे में रानी की सराय के ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत कुल 10 नामजद आरोपी कटघरे में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला अब अदालत सुनाएगी।

दशहरे के त्योहार पर हुआ था खून-खराबा: यह खूनी वारदात 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव में घटी थी। कथित तौर पर जमीन के विवाद और इलाके में वर्चस्व की जंग को लेकर दोनों पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें लाइसेंसी राइफल, रिवॉल्वर और तमंचों से अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस भीषण गोलीबारी में शिक्षक तालुकदार सिंह और उनके सगे भाई ठेकेदार पारस सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक की कानूनी जंग: इस मुकदमे का सफर बेहद पेचीदा और लंबा रहा। कानूनी प्रक्रिया के दौरान मुकदमे को आजमगढ़ से बाहर स्थानांतरित कराने के लिए भी पुरजोर कोशिशें की गईं। यह मामला 3 बार देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) और 10 बार इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। एडवोकेट विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह के अनुसार, इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाहों की गवाही कराई जा चुकी है। सुनवाई के इस लंबे दौर के बीच एक आरोपी राधेश्याम सिंह की मृत्यु भी हो चुकी है। वहीं, दूसरे पक्ष से जुड़े क्रास-केस में भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

इन आरोपियों पर टिकी है फैसले की निगाहें: इस हाई-प्रोफाइल मामले में रानी की सराय के ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह के अलावा राजेश सिंह, बलवंत सिंह, चुन्नू उर्फ रणजीत, छोटू, पंकज सिंह, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश सिंह और सिद्धार्थ सिंह मुकदमे का सामना कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अदालत 19 साल पुराने इस दोहरे हत्याकांड में क्या निर्णय सुनाती है।

आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: 19 साल का लंबा वक्त किसी भी पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ के इंतजार का बहुत बड़ा दौर होता है। क्या आपको लगता है कि मुकदमों के निस्तारण में इतनी देरी से आम जनता का न्याय प्रणाली पर असर पड़ता है? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट में जरूर साझा करें!

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