आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स): जिले के तरवा क्षेत्र में खाद की किल्लत को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मानपुर और मौलिया साधन सहकारी समितियों के मुख्य द्वार पर ताला लटकने के कारण सैकड़ों किसान रोजाना खाद के लिए भटकने को मजबूर हैं। बुवाई और सिंचाई के इस महत्वपूर्ण सीजन में समितियों के बंद होने से खेती-किसानी की पूरी चक्र व्यवस्था चरमरा गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानपुर समिति के सचिव अरविंद यादव और मौलिया समिति के सचिव संत कुमार सिंह अपने बकाए वेतन के भुगतान की मांग को लेकर राजधानी लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। सचिवों का स्पष्ट रुख है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक समितियों पर ताला बंद रहेगा और खाद का वितरण पूरी तरह ठप रहेगा।
सरकारी व्यवस्था की इस रस्साकशी का सीधा खामियाजा इलाके के गरीब और जरूरतमंद किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्र बंद होने का फायदा उठाकर निजी दुकानदार मनमाने और महंगे दामों पर खाद बेच रहे हैं। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनके कृषि बजट पर भारी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
क्षेत्रीय किसानों ने शासन और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द समितियों को खुलवाया जाए, ताकि समय पर खाद मिल सके और फसलों को नुकसान होने से बचाया जा सके।
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: एक तरफ अपना हक मांगते सचिव और दूसरी तरफ पिसता हुआ बेबस किसान! आजमगढ़ के इस खाद संकट और किसानों के शोषण के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!
