आजमगढ़ (अहिरौला)। जिले के अहिरौला थाना क्षेत्र स्थित मतलूबपुर गांव से एक ऐसी खबर आई है, जो प्रशासनिक तंत्र और समाज दोनों के लिए एक बड़ी मिसाल बन गई है। जिस गांव में कुछ समय पहले जलभराव और रास्ते की बदहाली से आजिज आकर ग्रामीणों ने अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर तक टांग दिए थे, वहां अब 5 साल पुराना गंभीर जलनिकासी विवाद आखिरकार सुलझ गया है।
गांव की इस विकट समस्या को दूर करने के लिए स्थानीय समाजसेवी संजय पांडेय (घल्लू) मसीहा बनकर सामने आए हैं। उन्होंने नाली निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए अपनी करीब 100 से 120 फुट निजी जमीन दान दे दी, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 5 लाख रुपये बताई जा रही है। गौरतलब है कि इस जलनिकासी परियोजना के लिए शासन स्तर से 21 लाख रुपये की योजना पहले ही स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन अतिक्रमण और निजी जमीन के पेंच के कारण निर्माण कार्य सालों से ठप पड़ा था।
जानकारी के मुताबिक, संजय पांडेय ने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए हार नहीं मानी। उन्होंने सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए पूरे 5 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाए जाने और संजय पांडेय द्वारा अपनी निजी जमीन दान करने के बाद अब नाली का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया है। इससे मतलूबपुर के ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही कीचड़ और जलभराव की मुसीबत से हमेशा के लिए राहत मिलने वाली है।
काम शुरू होने के इस खास मौके पर गांव में जश्न का माहौल देखने को मिला। इस दौरान सुरेश गौड़, संदीप गिरी, विरजू प्रजापति, विजय नारायण शुक्ला, रामजीत शर्मा, रामहित गुप्ता, दिनेश गुप्ता, रमेश गुप्ता, सूर्यकांत शर्मा, सत्य नारायण गौड़, महेश गौड़ और राजकुमार शर्मा समेत भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और इस सराहनीय कदम का स्वागत किया।
आजमगढ़ टाइम्स की चौपाल: प्रशासनिक सुस्ती के दौर में समाजसेवी संजय पांडेय की इस दरियादिली पर आपकी क्या राय है? क्या आपके गांव या मोहल्ले में भी कोई ऐसी ही समस्या है, जिसे आपसी सहयोग से सुलझाया जा सकता है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमें जरूर बताएं!
