आजमगढ़। आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र (347) की मतदाता सूची में घोर लापरवाही और कथित धांधली के मामले में आखिरकार प्रशासन का डंडा चल ही गया। एक ही नाम की कई बार एंट्री होने के सनसनीखेज खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कड़ी कार्रवाई की है। इस पूरे मामले में निगरानी में चूक और लापरवाही के आरोप में तत्कालीन सदर एसडीएम नरेंद्र गंगवार समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, मतदाता पंजीकरण केंद्र के एक कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को तत्काल प्रभाव से मतदाता सूची के काम से हटा दिया गया है।क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, बीते 15 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोप लगाया था कि विधानसभा क्षेत्र 347-आजमगढ़ की मतदाता सूची में ‘विकास यादव’ नामक मतदाता का नाम कथित तौर पर 10 बार दर्ज किया गया है। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े इस गंभीर आरोप के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मामले की विस्तृत जांच बैठाई गई।जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा:
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और चौंकाने वाला निकला। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची में हिंदी में ‘विकास यादव’ नाम कुल 13 बार दर्ज पाया गया। बारीकी से जांच करने पर पता चला कि इनमें से एक प्रविष्टि गोरखपुर जिले के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र की है, जहाँ मतदाता और उनके पिता का नाम समान था। दो प्रविष्टियां नियमानुसार पहले ही हटाई जा चुकी थीं। बाकी बची 11 प्रविष्टियां आजमगढ़ के अलग-अलग गांवों में रहने वाले 11 अलग-अलग व्यक्तियों की पाई गईं। अब असली विकास यादव को छोड़कर अन्य 10 लोगों के विवरण में संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरवाया गया है।कंप्यूटर सहायक और 5 BLO पर गाज:
वोटर लिस्ट की तैयारी में लापरवाही बरतने के जुर्म में मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर सहायक संजय कुमार प्रजापति और 5 BLO को मतदाता सूची के काम से बेदखल कर दिया गया है। हटाए गए BLO में आंगनबाड़ी कार्यकत्री गीता देवी प्रथम, गीता देवी द्वितीय, सुनीता देवी, शीला देवी और रोजगार सेवक उमेश कुमार यादव शामिल हैं। इन कर्मचारियों की सेवा समाप्ति और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत दंडात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है।तत्कालीन SDM समेत 3 अफसरों पर शिकंजा:
मतदाता सूची के काम में घोर लापरवाही और लचर निगरानी के लिए तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी व तत्कालीन सदर SDM नरेंद्र गंगवार, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (आयुर्वेदिक चिकित्सक) डॉ. मोनिका अग्रवाल और तत्कालीन नायब तहसीलदार सदर माधवेंद्र प्रताप सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने हेतु चार्जशीट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, धारा 32 के तहत नोटिस देने को कहा गया है। मामला यहीं नहीं थमा, जिला निर्वाचन अधिकारी आजमगढ़ को जिले की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की गहन जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
क्या आपको लगता है कि मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियां महज ‘मानवीय भूल’ हैं या फिर इसके पीछे कोई बड़ी प्रशासनिक साठगांठ है? क्या चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर दर्ज करें और खबर को शेयर करें!
