आजमगढ़। जनपद को टीबी मुक्त बनाने के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग “टीबी उन्मूलन अभियान” के जरिए घर-घर दस्तक देने की बात कह रहा है, तो दूसरी तरफ जिले के 5 महत्वपूर्ण ब्लॉकों में जांच की बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। आलम यह है कि संदिग्ध मरीजों को अपनी जांच कराने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल की खाक छाननी पड़ रही है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 तक आजमगढ़ जिले में लगभग 6,000 टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 4,000 मरीजों का इलाज निजी डॉक्टरों के पास चल रहा है, जबकि शेष जिला क्षय रोग विभाग की देखरेख में हैं। विडंबना देखिए कि मंडलीय अस्पताल परिसर स्थित टीबी अस्पताल में खुद की एक्सरे मशीन तक की सुविधा सुचारू नहीं है। मरीजों को एक्सरे के लिए ट्रामा सेंटर भेजा जाता है, जिससे गंभीर मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
इन ब्लॉकों में स्वास्थ्य सेवाएं “बीमार”
आजमगढ़ टाइम्स की पड़ताल में सामने आया है कि मेंहनगर और मेहनाजपुर के सरकारी अस्पतालों में एक्सरे की सुविधा न होने से मरीज परेशान हैं। वहीं, अहरौला, पवई और मार्टीगंज की पैथोलॉजी का हाल और भी बुरा है। यहाँ लैब टेक्नीशियन (LT) न होने की वजह से जांच ठप पड़ी है। इन पांचों इलाकों के मरीजों को छोटी सी जांच के लिए भी लंबी दूरी तय कर दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ता है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बी.पी. सिंह ने बताया कि “कुछ स्थानों पर लैब टेक्नीशियन और एक्सरे टेक्नीशियन की कमी है। इसके चलते मरीजों को दूसरे केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है और मरीजों की खोज के लिए अभियान निरंतर जारी है।”
मरीजों को मिलता है आर्थिक संबल
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, टीबी मरीजों को बेहतर खान-पान और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने के लिए सरकार की ओर से प्रतिमाह 1,000 रुपये का भत्ता दिया जा रहा है। इसके लिए मरीजों का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है। विभाग का दावा है कि वे 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, कुपोषित बच्चों, धूम्रपान करने वालों और शुगर के मरीजों की विशेष स्क्रीनिंग कर रहे हैं, क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आपको बलगम वाली खांसी, बलगम में खून आना, शाम को बुखार, सीने में दर्द, अचानक वजन गिरना या रात में पसीना आने जैसी समस्या है, तो यह टीबी के लक्षण हो सकते हैं। इसे छिपाने के बजाय तुरंत सरकारी केंद्र पर जांच करानी चाहिए, बशर्ते वहां मशीन और टेक्नीशियन मौजूद हों!
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या आपको लगता है कि बिना पर्याप्त स्टाफ और मशीनों के आजमगढ़ को टीबी मुक्त बनाया जा सकता है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
