Fri, Nov 6, 2026 Updated 07:59 PM IST
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आजमगढ़: तरवां में सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही! प्रसव के 2 साल बाद भी नहीं बना जन्म प्रमाण पत्र, “वसूली” का भी आरोप

4 hours पहले

आजमगढ़। जिले के तरवां ब्लॉक अंतर्गत सराय वृंदावन ग्राम पंचायत से स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। उप स्वास्थ्य केंद्र तरवां में जन्म लेने वाले एक बच्चे को प्रसव के करीब दो साल बीत जाने के बाद भी आज तक जन्म प्रमाण पत्र नसीब नहीं हुआ है। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर की जा रही इस लापरवाही ने पीड़ित परिवार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

पीड़ित मां राधिका देवी (निवासी- उचहुवां, मेहनगर) ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनका संस्थागत प्रसव आशा कार्यकर्ता की देखरेख में उप स्वास्थ्य केंद्र तरवां में हुआ था। आरोप है कि जब उन्होंने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र की मांग की, तो आशा कार्यकर्ता प्रियंका देवी ने कथित तौर पर कहा कि “अब प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है और इसके लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे।” प्रमाण पत्र न बनने के कारण परिवार को डर है कि बच्चे का न तो समय पर आधार कार्ड बन पाएगा और न ही आगे चलकर स्कूल में दाखिले या किसी सरकारी योजना का लाभ मिल सकेगा।

क्या कहता है नियम?
स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार, संस्थागत प्रसव (सरकारी अस्पताल में बच्चे के जन्म) के बाद तय प्रक्रिया के तहत 21 दिनों के भीतर जन्म प्रमाण पत्र परिजनों को बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि गरीब परिवारों को इस एक कागज के लिए दफ्तरों और तहसीलों के चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि तरवां इलाके की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी इस तरह का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

मामला तूल पकड़ते देख आशा कार्यकर्ता प्रियंका यादव ने सफाई देते हुए कहा है कि वह जल्द ही पीड़ित परिवार के सभी कागजात लेकर खुद उप स्वास्थ्य केंद्र जाएंगी और जल्द से जल्द जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की पहल करेंगी।

“आजमगढ़ टाइम्स” का सवाल: क्या सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त मिलने वाले जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर हो रही इस तरह की देरी और कथित धन उगाही पर स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़ा संज्ञान नहीं लेना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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