आजमगढ़। सरकारी खजाने को चूना लगाने वालों और नियमों को ताक पर रखकर जमीनों का हेरफेर करने वालों पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। आजमगढ़ जिले में अक्टूबर महीने के भीतर कथित तौर पर की गई बड़ी स्टांप चोरी का भंडाफोड़ हुआ है। राजस्व और निबंधक विभाग की सतर्कता के बाद हुई जांच में कुल 43 लाख 28 हजार रुपये की स्टांप चोरी का मामला उजागर हुआ है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही भू-माफियाओं और नियमों की अनदेखी करने वालों में हड़कंप व्याप्त है।
मिली जानकारी के अनुसार, जमीनों के बैनामे और रजिस्ट्री के दौरान सर्किल रेट से कम मूल्य दर्शाने या फिर गलत तथ्यों के आधार पर स्टांप शुल्क में कटौती करने का खेल खेला जा रहा था। जब विभाग ने दस्तावेजों और जमीनों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया तेज की, तो कई चौकाने वाले मामले सामने आए। अधिकारियों का कहना है कि जहां-जहां कम स्टांप लगाए जाने का आरोप सिद्ध हुआ है, वहां बकाये की वसूली के साथ-साथ नियमानुसार आर्थिक दंड भी तय किया जा रहा है।
विभाग के इस कड़े रुख से यह साफ संदेश गया है कि राजस्व की क्षति पहुंचाने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में भी रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच का यह अभियान और तेज किया जा सकता है, ताकि पारदर्शी व्यवस्था बनी रहे और सरकार को किसी तरह का नुकसान न हो।
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या आपको लगता है कि जमीनों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सख्त बनाकर इस तरह की स्टांप चोरी पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सकती है? अपनी राय नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।
