आजमगढ़। देश की सीमा सुरक्षा में अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ियों पर तैनात आजमगढ़ के वीर सपूत हवलदार उपेंद्र यादव की शहादत की पुष्टि आखिरकार डीएनए (DNA) जांच के जरिए हो गई है। बीते 14 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में लापता हुए जवान का पार्थिव अवशेष बुधवार को जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा सिधारी इलाका गमगीन हो गया। लगभग ढाई महीने से जिस बेटे के सकुशल घर लौटने की आस में परिवार की आंखें टकटकी लगाए बैठी थीं, वहां अचानक मातम का सन्नाटा पसर गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिधारी थाना क्षेत्र के मोहम्मदल्ला गांव के रहने वाले उपेंद्र यादव भारतीय सेना की 5वीं ग्रेनेडियर रेजिमेंट में हवलदार पद पर तैनात थे। बीते 14 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में आई भीषण बाढ़ के दौरान प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से सेना के 5 जवान लापता हो गए थे, जबकि 2 जवानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। इस हादसे के बाद से ही भारतीय सेना की ओर से लापता जवानों की तलाश के लिए लगातार व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था।
उधर, आजमगढ़ में हवलदार उपेंद्र के परिजन लगातार ईश्वर से उनके सही-सलामत होने की प्रार्थना कर रहे थे। इसी बीच खोजबीन के दौरान सेना को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से एक शव का हिस्सा बरामद हुआ। शहीद जवान के भाई सत्येंद्र यादव के मुताबिक, बरामद हुए शव के हिस्से का डीएनए परीक्षण कराया गया। जांच रिपोर्ट में डीएनए का मिलान हवलदार उपेंद्र यादव से होने के बाद सेना के आला अधिकारियों ने परिजनों को दुखद सूचना दी।
बुधवार को जब सैन्य सम्मान के साथ शहीद जवान का पार्थिव अवशेष उनके गांव मोहम्मदल्ला पहुंचा, तो वहां मौजूद ग्रामीणों का कलेजा मुंह को आ गया। वृद्ध माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने माटी के लाल के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी उमड़ पड़े और नम आंखों से जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की। आजमगढ़ टाइम्स परिवार इस वीर बलिदानी की शहादत को नमन करता है।
आजमगढ़ टाइम्स की अपील: देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले आजमगढ़ के इस वीर सपूत हवलदार उपेंद्र यादव के अमर बलिदान पर आप क्या कहना चाहेंगे? कमेंट सेक्शन में अपनी भावनाएं व्यक्त करें और शहीद को श्रद्धांजलि दें।
