Sun, Nov 8, 2026 Updated 04:04 AM IST
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आजमगढ़ के सरकारी स्कूलों की चमकेगी किस्मत: इंटरनेट और मरम्मत के लिए जारी हुए करोड़ों रुपये, जानें आपके गांव के स्कूल को क्या मिला?

5 days पहले

आजमगढ़। जिले के परिषदीय स्कूलों को हाईटेक बनाने और उनकी सूरत संवारने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। आजमगढ़ के 2,659 सरकारी स्कूलों के लिए सत्र 2026-27 के तहत मंजूर किए गए करोड़ों रुपये के बजट की दूसरी किस्त जारी कर दी गई है। इस धनराशि से न सिर्फ स्कूलों में इंटरनेट की समस्या दूर होगी, बल्कि स्कूल भवनों की मरम्मत और स्वच्छता कार्यों को भी नई रफ्तार मिलेगी।

टैबलेट के लिए मिलेगा 1.30 करोड़ का “इंटरनेट डोज”
आजमगढ़ टाइम्स नेटवर्क को मिली जानकारी के अनुसार, शासन ने कंपोजिट ग्रांट की दूसरी किस्त के रूप में 4.50 करोड़ रुपये का बजट विभाग को भेज दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राजीव पाठक ने बताया कि इस धनराशि में से सबसे पहले 1.30 करोड़ रुपये की कटौती की जाएगी, जिसे स्कूलों को दिए गए टैबलेट के सिम और इंटरनेट खर्च के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे शिक्षकों को ऑनलाइन हाजिरी और अन्य डिजिटल कार्यों में आ रही नेटवर्क की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है।

नामांकन के आधार पर स्कूलों को मिलेगा पैसा
सत्र 2026-27 के लिए जिले के कुल 2,659 विद्यालयों के लिए कुल 9 करोड़ 35 लाख 55 हजार रुपये का बजट स्वीकृत है। इसकी पहली किस्त (50 फीसदी) मई माह में ही भेज दी गई थी। अब दूसरी किस्त के माध्यम से शेष धनराशि स्कूलों के छात्र नामांकन के आधार पर भेजी जा रही है। बजट के आवंटन को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
1. 1 से 30 छात्र: 10,000 रुपये
2. 31 से 100 छात्र: 25,000 रुपये
3. 101 से 250 छात्र: 50,000 रुपये
4. 251 से अधिक छात्र: 75,000 रुपये

मरम्मत से लेकर “निपुण भारत” की ब्रांडिंग तक
डीसी निर्माण अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, इस कंपोजिट ग्रांट का इस्तेमाल स्कूलों में कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाना है। इसमें हैंडपंप और टोटी की मरम्मत (टैप रनिंग वॉटर), स्कूल भवन की पुताई और अन्य छोटे-मोटे निर्माण कार्य शामिल हैं। बजट का 10 फीसदी हिस्सा अनिवार्य रूप से स्वच्छता अभियान के लिए आरक्षित रखा गया है, ताकि बच्चों को साफ-सुथरा माहौल मिल सके। इसके साथ ही स्कूल की दीवारों पर “निपुण भारत” का लोगो और नारे भी लिखवाए जाएंगे।

पारदर्शिता पर जोर
विभाग का दावा है कि बजट सीधे स्कूलों के खातों में भेजा जा रहा है ताकि काम में पारदर्शिता बनी रहे। शासन की इस पहल से ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में भी अब शहर जैसी डिजिटल सुविधाएं और बेहतर बुनियादी ढांचा देखने को मिलेगा।

आजमगढ़ टाइम्स आपसे पूछता है: क्या आपको लगता है कि स्कूलों को मिलने वाले इस बजट से शिक्षा के स्तर में वाकई सुधार होगा या बजट का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए और कड़ी निगरानी की जरूरत है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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