Sun, Nov 8, 2026 Updated 04:40 AM IST
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आजमगढ़ के 56 स्कूलों पर “मौत” का साया: हाईटेंशन तारों के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, 2 करोड़ खर्च के बाद भी कछुआ चाल!

4 days पहले

आजमगढ़: जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों नौनिहालों की जिंदगी इस वक्त दांव पर लगी है। “आजमगढ़ टाइम्स” की पड़ताल में सामने आया है कि जिले के 56 परिषदीय स्कूलों के ऊपर से मौत बनकर हाईटेंशन तार गुजर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन और बिजली विभाग के बीच चल रही कागजी खानापूर्ति के बीच मासूम बच्चे हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।

आंकड़ों का खेल और विभागों की सुस्ती
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, करीब चार साल पहले जनपद में ऐसे 260 स्कूलों को चिह्नित किया गया था, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। इन तारों को हटाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने लगभग दो साल पहले ही बिजली विभाग को “213.08 लाख रुपये” की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर कर दी थी। लेकिन बजट मिलने के बावजूद काम की रफ्तार बेहद सुस्त रही। विभाग का दावा है कि अब तक 201 स्कूलों से तार हटाए जा चुके हैं, लेकिन 56 स्कूलों में अभी भी खतरा जस का तस बना हुआ है।

आमने-सामने आए बिजली और शिक्षा विभाग
इस गंभीर मामले में दोनों विभागों के आंकड़ों में भी विरोधाभास नजर आ रहा है। जहां बेसिक शिक्षा विभाग 56 स्कूलों को अभी भी खतरे के दायरे में बता रहा है, वहीं बिजली विभाग का कहना है कि केवल 46 स्कूलों में काम बाकी है। ग्रामीण इलाकों की स्थिति तो और भी डरावनी है; कई स्कूलों की दीवारों से बिजली के खंभे सटे हुए हैं, तो कहीं जर्जर तार बच्चों के सिर के ठीक ऊपर लटक रहे हैं। बारिश और आंधी के दौरान यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

अधिकारियों का “अल्टीमेटम” और नई डेडलाइन
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग के मुख्य अभियंता इंजीनियर रामबाबू ने अब सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सहायक शिक्षा निदेशक और बीएसए के साथ बैठक कर एक संयुक्त टीम गठित की है, जो दो दिनों के भीतर स्कूलों की सटीक सूची तैयार करेगी। मुख्य अभियंता ने निर्देश दिए हैं कि 15 से 20 नवंबर तक हर हाल में इन खतरनाक लाइनों को शिफ्ट कर दिया जाए। लापरवाही बरतने वाले एक्सईएन (XEN) और एसडीओ (SDO) पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

जिम्मेदारों ने क्या कहा?
आजमगढ़ के बीएसए राजीव पाठक ने कथित तौर पर बिजली विभाग की सुस्ती को इस खतरे के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि “बिजली विभाग की धीमी कार्रवाई के चलते शिक्षकों और बच्चों पर लगातार खतरा बना हुआ है।” वहीं, मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया है कि शिफ्टिंग का काम प्रगति पर है और इसे तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है या 20 नवंबर तक वाकई इन नौनिहालों को इस “मौत के साये” से मुक्ति मिल जाएगी? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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