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18 साल बाद मिला इंसाफ! आजमगढ़ के चर्चित दोहरे हत्याकांड में ब्लॉक प्रमुख समेत 9 दोषियों को उम्रकैद, लगा भारी जुर्माना

1 week पहले

आजमगढ़। आजमगढ़ जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र स्थित रुदरी गांव के चर्चित दोहरे हत्याकांड में आखिरकार 18 साल बाद न्याय की जीत हुई है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक कमलापति की अदालत ने मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए ब्लॉक प्रमुख समेत सभी 9 आरोपियों को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 74-74 हजार रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड भी आयद किया है।

क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत साल 2007 में दशहरे के पावन पर्व पर हुई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 21 अक्टूबर 2007 को सुबह करीब नौ बजे रुदरी गांव निवासी रामजन्म सिंह अपने दरवाजे पर बैठे हुए थे। इसी दौरान चुनावी और पुरानी रंजिश को लेकर गांव के तत्कालीन प्रधान विपिन सिंह, राजेश सिंह, चुन्नू उर्फ रणविजय, बलवंत सिंह, राधेश्याम सिंह, छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश और शिवदास सिंह असलाहों और लाठी-डंडों से लैस होकर हमला बोलने की नीयत से वहां आ पहुंचे।

दहाड़े की गई थी दो भाइयों की हत्या
आरोप के अनुसार, दरवाजे पर पहुंचते ही हमलावरों ने तांडव मचाना शुरू कर दिया। विपिन सिंह ने तालुकदार सिंह पर सीधी गोली चला दी, वहीं राजेश सिंह ने पारसनाथ सिंह को निशाना बनाते हुए गोली मार दी। गोली लगते ही दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इतने से भी जब मन नहीं भरा, तो बाकी आरोपियों ने रामजन्म सिंह, उनके भतीजे अंकित सिंह और आशीष को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीट-पीटकर लहूलुहान कर दिया।

17 गवाहों की गवाही और 18 साल का संघर्ष
घटना के बाद हरकत में आई पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट अदालत में दाखिल की। मुकदमे की लंबी सुनवाई के दौरान एक आरोपी राधेश्याम सिंह की मृत्यु हो गई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गोपाल पांडे और विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह ने कुल 17 गवाहों को पेश कर मामले की मजबूत पैरवी की।

अदालत ने दोनों पक्षों की तीखी बहस, चश्मदीदों के बयान और पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों के आधार पर सभी आरोपियों को हत्या का कसूरवार पाया और सभी 9 दोषियों को जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।

आजमगढ़ टाइम्स की जन-अदालत: 18 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस सख्त अदालती फैसले को आप किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि ऐसे फैसलों से अपराधियों में खौफ पैदा होगा? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें!

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