आजमगढ़। शहर की बदहाल व्यवस्था और अधिकारियों की अदूरदर्शिता का इससे बड़ा नमूना क्या हो सकता है कि जिस शहर में आम जनता के लिए पैदल चलना तक दूभर हो, वहां लाखों रुपये खर्च कर ऐसे भारी वाहन खरीद लिए जाएं जो इन सड़कों पर उतर ही न सकें! जी हां, आजमगढ़ नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है।
ताजा मामला नगर पालिका द्वारा हाल ही में लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए आधुनिक ‘रिफ्यूज कंपैक्टर ट्रकों’ (कचरा निस्तारण वाहन) से जुड़ा है। आरोप है कि जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए नगर पालिका प्रशासन ने इन भारी-भरकम ट्रकों की खरीद तो कर ली, लेकिन अब यह योजना खुद पालिका के गले की फांस बनती दिख रही है। शहर के अधिकांश वार्डों की सड़कें इतनी संकरी और बदहाल हैं कि वहां इन विशालकाय कंपैक्टर ट्रकों का पहुंचना लगभग नामुमकिन है। नतीजा यह है कि जनता के टैक्स के लाखों रुपये से खरीदे गए ये चमचमाते वाहन सड़कों पर उतरने के बजाय नगर पालिका के गोदाम में खड़े होकर धूल फांक रहे हैं।
सड़कों पर चलना मुहाल, भारी वाहनों पर बहाया बजट
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि शहर के मुख्य मार्गों से लेकर विभिन्न मोहल्लों की अंदरूनी सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। आए दिन लोग गड्ढों की वजह से दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। नागरिकों की पहली मांग सड़कों की मरम्मत, जल निकासी और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की थी। मगर आरोप है कि जनता की प्राथमिक जरूरतों को ताक पर रखकर भारी बजट वाले वाहनों की खरीद को प्राथमिकता दी गई, जिसका लाभ आम जनता को मिलता नहीं दिख रहा है।
नगर पालिका की इस कथित फिजूलखर्ची और योजना विहीन खरीदारी को लेकर शहरवासियों में आक्रोश पनप रहा है। लोगों का सवाल है कि जब शहर की सड़कें इन बड़े ट्रकों के चलने लायक ही नहीं थीं, तो इतनी बड़ी रकम खर्च करने से पहले रूट और जमीनी स्तर का सर्वे क्यों नहीं किया गया?
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