आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET-2026) को लेकर जिले में प्रशासनिक मुस्तैदी चरम पर है। आजमगढ़ के 30 परीक्षा केंद्रों पर कुल 13,344 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दो पालियों में आयोजित हो रही इस परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी और नकलविहीन संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने तगड़ी घेराबंदी की है।
परीक्षा व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. अनिल कुमार ने खुद कमान संभाली। आला अधिकारियों की टीम ने आधी रात को ही बस अड्डे और रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने दूर-दराज के जिलों से आए परीक्षार्थियों से सीधे बातचीत की और उनके आवागमन व ठहरने की व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन का यह कदम अभ्यर्थियों की सुरक्षा और सहूलियत के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
नकल माफिया और परिंदों की सेंधमारी रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे को पूरी तरह ‘नो-सर्विस जोन’ बना दिया गया है। इस दायरे में आने वाली सभी फोटोकॉपी और स्कैनर की दुकानें सख्त आदेश के तहत बंद करा दी गई हैं। परीक्षा कक्ष के भीतर मोबाइल फोन, पेजर या किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। अनाधिकृत लोगों की आवाजाही पर भी कड़ा पहरा बैठाया गया है।
प्रशासनिक तंत्र को मुस्तैद रखते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी स्टैटिक मजिस्ट्रेट परीक्षा के दिन सुबह 6 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने आवंटित केंद्रों पर पहुंचेंगे और इसकी सूचना सीधे परीक्षा नियंत्रण कक्ष को देंगे। वहीं, सेक्टर मजिस्ट्रेटों को लगातार भ्रमणशील रहकर केंद्रों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सभी 30 केंद्रों को हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है। कक्ष निरीक्षकों की निष्पक्ष तैनाती और हर गतिविधि की लाइव रिकॉर्डिंग के साथ आजमगढ़ प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने की किसी भी कथित कोशिश को बख्शा नहीं जाएगा।
‘आजमगढ़ टाइम्स’ का पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि केंद्रों के बाहर फोटोकॉपी दुकानें बंद करने और अफसरों की इस तरह की ‘नाइट गश्त’ से सरकारी परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर पूरी तरह नकेल कसी जा सकती है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
