आजमगढ़: उत्तर प्रदेश को “वन ट्रिलियन” डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री के सपने को धरातल पर उतारने के लिए आजमगढ़ में सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। जिले की अर्थव्यवस्था में हर व्यक्ति के वास्तविक योगदान को मापने के लिए “आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण” (PLFS) का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य जिले की जीडीपी (GDP) में सटीक भागीदारी का आकलन करना है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, आजमगढ़ में अब तक 32 यूनिट्स का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। जिला प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए दिसंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है। आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई 2025 से अप्रैल 2026 तक यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार द्वारा नामित संस्था “उर्मिला फाउंडेशन” के संविदा कर्मियों के पास थी। लेकिन जुलाई 2026 से अब जिला अर्थ एवं संख्या विभाग के कर्मचारी खुद कमान संभालकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं।
इन तीन बड़े पैमानों पर टिकी है पूरी रिपोर्ट:
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह सर्वे मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है:
1. कामकाजी जनसंख्या अनुपात: कुल आबादी में कितने प्रतिशत लोग वास्तव में काम कर रहे हैं।
2. श्रम बल सहभागिता दर: वे लोग जो काम कर रहे हैं या सक्रिय रूप से काम की तलाश में हैं।
3. कुल संख्या: श्रम बल में शामिल लोगों का वास्तविक आंकड़ा।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति:
सर्वेक्षण को पारदर्शी बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में एक यूनिट के तहत किसी मोहल्ले के लगभग 100 से 150 मकानों को शामिल किया गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में पूरे गांव को ही एक यूनिट मानकर सर्वे किया जा रहा है। सर्वेक्षक दो चरणों में जानकारी जुटा रहे हैं। पहले चरण में परिवार की सामान्य जानकारी और दूसरे चरण में हाईस्कूल (10वीं) या उससे अधिक शिक्षित सदस्यों के रोजगार, मासिक आय और कार्यस्थल का पूरा ब्यौरा लिया जा रहा है।
महिलाओं की भागीदारी पर विशेष नजर:
इस सर्वे के जरिए सरकार यह भी पता लगा रही है कि खेती-किसानी, सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र या स्वरोजगार में महिलाओं की कितनी हिस्सेदारी है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राम दरश यादव ने बताया कि जुलाई से अक्टूबर तक 32 यूनिट का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने जनता से अपील की है कि जब सर्वेक्षक उनके घर आएं, तो उन्हें बिल्कुल सही जानकारी दें। गलत जानकारी से भविष्य की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
जनवरी 2027 से बदलेगा स्वरूप:
वर्तमान सर्वे इस साल दिसंबर के अंत तक चलेगा। इसके बाद, जनवरी 2027 से भारत सरकार की अनुमति मिलने पर नए प्रारूप और नई तकनीक के साथ इस सर्वे को आगे बढ़ाया जाएगा। इस डेटा के आधार पर ही भविष्य में बेरोजगारी दर का आकलन होगा और नई रोजगारपरक योजनाओं का खाका तैयार किया जाएगा।
आजमगढ़ टाइम्स की राय: सरकारी सर्वे में सही जानकारी देना एक जागरूक नागरिक की पहचान है, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आपके क्षेत्र के विकास के लिए बजट और योजनाएं तय होती हैं।
पाठकों से सवाल: क्या आपके क्षेत्र में सर्वे टीम पहुंची है? क्या आपको लगता है कि इस तरह के सर्वे से जिले में बेरोजगारी की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
