आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। जनता की समस्याओं को लेकर लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर आजमगढ़ जिला प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित आईजीआरएस (IGRS) समीक्षा बैठक के दौरान बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने वाले दो बड़े अधिकारियों पर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कड़ी कार्रवाई की है। डीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका त्रिपाठी और पीओ डूडा डॉ. महेंद्र प्रसाद का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश जारी कर दिया है।
समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि केवल आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण रिपोर्ट अपलोड कर देना ही काफी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि फाइलों का पेट भरने के बजाय पीड़ित शिकायतकर्ता को धरातल पर वास्तविक समाधान मिलना चाहिए। डीएम ने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी स्तर पर की गई लीपापोती या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन 5 विभागों पर रही पैनी नजर, तहसीलों को भी निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य रूप से 5 प्रमुख विभागों—राजस्व, विद्युत, पंचायती राज, ग्राम्य विकास और खाद्य एवं रसद विभाग में दर्ज शिकायतों का गहन विश्लेषण किया गया। डीएम ने निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार कर्मचारियों को सीधे गांवों में भेजकर मौके पर जांच कराई जाए। इसके अलावा सगड़ी, फूलपुर, सदर, बूढ़नपुर और लालगंज तहसीलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए संबंधित नायब तहसीलदारों को गांवों में जाकर मामलों की मौके पर जांच करने के आदेश दिए गए।
बिजली विभाग के खराब प्रदर्शन पर भड़के डीएम
विद्युत विभाग से जुड़ी शिकायतों पर जनता के असंतोष और खराब फीडबैक को देखकर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) को कड़ा निर्देश दिया कि वे जेई (JE) वार रिपोर्ट तैयार करें और हर शिकायत के निस्तारण का समाधान प्रमाण पत्र जमा करें। डीएम ने दो टूक कहा कि यदि उपभोक्ता की समस्या कागजों से इतर धरातल पर हल नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ताओं से सीधे बात करेंगे अफसर
प्रशासनिक कार्यशैली में सुधार लाने के लिए डीएम ने अफसरों को आदेश दिया है कि वे अब खुद शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर उनकी संतुष्टि की स्थिति जांचेंगे। जिन मामलों में फरियादी असंतुष्ट पाए जाएंगे, वहां अधिकारी खुद मौके पर जाकर समस्या समझेंगे। साथ ही जिन गांवों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, वहां अधिकारियों को खुद पहुंचकर चौपाल लगाने और लोगों से संवाद करने का निर्देश दिया गया है।
आजमगढ़ टाइम्स की जन-अदालत: क्या आपको लगता है कि अधिकारियों का वेतन रोकने जैसे कड़े फैसलों से आजमगढ़ में सरकारी तंत्र की कार्यशैली बदलेगी? क्या आपके क्षेत्र में आईजीआरएस शिकायतों का सही समाधान हो रहा है? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं!


