आजमगढ़। जिला अस्पताल परिसर में शनिवार को स्वास्थ्य सेवाएं उस वक्त प्रभावित नजर आईं, जब राजकीय नर्सेस संघ के बैनर तले नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया। अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित नर्सों ने कार्य बहिष्कार करते हुए “काला दिवस” मनाया और रेड क्रॉस सोसाइटी के मुख्य गेट पर बैठकर जमकर नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन किया।
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही नर्सेस संघ की जिलाध्यक्ष अनीता यादव ने कहा कि लंबे समय से नर्सिंग संवर्ग की जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने अपनी प्रमुख मांगों को रखते हुए कहा कि नर्सिंग कर्मियों को एक समान भत्ता दिया जाना चाहिए और उनकी तैनाती गृह जनपद में करने की व्यवस्था लागू की जाए। इसके साथ ही निदेशालय स्तर से लेकर अस्पतालों तक खाली पड़े पदों पर तत्काल पदोन्नति और नई भर्तियां शुरू की जाएं।
संघ ने यह भी मांग उठाई कि बीएससी नर्सिंग जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले कर्मियों को सवेतन अवकाश की सुविधा मिले और महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सहूलियत के लिए अस्पतालों में “पालना घर” (डे-केयर) की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
स्वास्थ्य कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि फिलहाल यह केवल दो घंटे का प्रतीकात्मक कार्य बहिष्कार और सांकेतिक धरना है। अगर शासन और प्रशासन ने उनकी 13 सूत्रीय मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे पूरे दिन का पूर्ण कार्य बहिष्कार करने को मजबूर होंगे, जिससे होने वाली किसी भी असुविधा की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस विरोध प्रदर्शन में जिलामंत्री शशिकला, आशा यादव, अर्चना, आशुतोष, ममता, शशिकला गोंड सहित भारी संख्या में स्वास्थ्य कर्मी शामिल रहे और अपनी आवाज बुलंद की।
आजमगढ़ टाइम्स की चौपाल: क्या आपको लगता है कि अस्पतालों में दिन-रात सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को गृह जनपद में तैनाती और समान भत्ते जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं!
