आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। नगर पालिका परिषद आजमगढ़ का जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार और दलालों की कारगुजारियों को लेकर विवादों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर एक दलाल और पालिका कर्मचारी के बीच रुपयों के लेनदेन को लेकर तीखी बहस होती दिखाई दे रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ नगर पालिका के सभासदों महताब कुरैशी, संतोष चौहान, शेखर, शहजाद कुरैशी और मोहम्मद अफजल ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभासदों का सीधा आरोप है कि सामान्य जनता को जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दफ्तर के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते हैं। आरोप है कि बिना बिचौलियों की “सेटिंग” के सीधे तौर पर आम आदमी का काम होना लगभग नामुमकिन बना दिया गया है।
मामले में प्रशासनिक अनियमितता का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि चतुर्थ श्रेणी पद (माली) पर तैनात अनिल कुशवाहा से नियमों को दरकिनार कर कंप्यूटर ऑपरेटर का काम कराया जा रहा है। यही नहीं, अनिल का बीते महीने ही निर्माण विभाग में स्थानांतरण कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह पुरानी जिम्मेदारी पर ही डटे हुए हैं। इसके अलावा, “रामू” नाम के एक कथित बिचौलिए पर आरोप लगा है कि वह प्रति जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर आम लोगों से 3,000 रुपये या उससे अधिक की अवैध वसूली कर रहा है। मांग पूरी न होने पर आवेदकों की फाइलों को जानबूझकर अटकाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी ऐसी शिकायतें अधिकारियों के संज्ञान में लाई गई थीं, लेकिन व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही। अब आक्रोशित सभासदों और नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस वायरल वीडियो की उच्च स्तरीय जांच कराने, कथित वसूली के खेल का पर्दाफाश करने और इसमें संलिप्त दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे मामले पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से आधिकारिक पक्ष आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकेगी।
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