आजमगढ़। न्याय की चक्की भले ही धीमी चलती है, लेकिन जब चलती है तो बड़े-बड़े रसूखदारों को भी कानून के कटघरे में झुकना पड़ता है। आजमगढ़ जिले के चर्चित ‘रुदरी हत्याकांड’ में करीब 19 साल के लंबे इंतजार के बाद सोमवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर एक) कमलापति की अदालत ने दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में वर्तमान ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत आठ आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह खूनी दास्तां साल 2007 की है। आरोप है कि चुनावी रंजिश को लेकर दशहरे के दिन 21 अक्तूबर की सुबह करीब 9 बजे रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव में कोहराम मच गया था। वादी मुकदमा रामजन्म सिंह के मुताबिक, जब वे अपने दरवाजे पर बैठे थे, तभी तत्कालीन ग्राम प्रधान विपिन सिंह अपने साथियों राजेश सिंह, चुन्नू उर्फ रणविजय, बलवंत सिंह, राधेश्याम सिंह, छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश और शिवदास सिंह के साथ हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे थे। इस दौरान हुई हिंसक वारदात में दो सगे भाइयों की जान चली गई थी।
क्रॉस केस में भी आया फैसला
अदालत ने न केवल दोहरे हत्याकांड में फैसला सुनाया, बल्कि इसी मामले से जुड़े क्रॉस केस में भी सुनवाई पूरी की। जहाँ एक तरफ मुख्य मामले में ब्लॉक प्रमुख समेत 8 लोगों को हत्या का दोषी पाया गया, वहीं दूसरी तरफ क्रॉस केस में कातिलाना हमले और मारपीट के आरोप में 6 अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराया गया है।
29 अक्तूबर को होगा सजा का एलान
सोमवार को कोर्ट रूम में भारी गहमागहमी के बीच जैसे ही जज ने दोषियों के नाम पुकारे, इलाके के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। फिलहाल सभी दोषियों को हिरासत में ले लिया गया है। अदालत ने सजा की अवधि तय करने के लिए 29 अक्तूबर की तारीख मुकर्रर की है। 19 साल पुराने इस मामले में न्याय मिलने से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, वहीं रसूखदारों के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
आजमगढ़ टाइम्स सवाल: क्या आपको लगता है कि जघन्य अपराधों के मामलों में 19 साल का लंबा वक्त लगना न्याय प्रणाली की कमजोरी है या फिर देर से ही सही, दुरुस्त फैसला आया है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।


