Sat, Nov 7, 2026 Updated 02:58 PM IST
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आजमगढ़ मंडलीय अस्पताल में अब “सांस” लेना होगा आसान: फेफड़ों की जांच और ENT के लिए शासन को भेजा गया बड़ा प्रस्ताव, जानें क्या बदलेगा

2 weeks पहले

आजमगढ़: जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आजमगढ़ मंडलीय अस्पताल में अब फेफड़ों और नाक-कान-गला (ENT) से संबंधित गंभीर बीमारियों की जांच के लिए मरीजों को वाराणसी या गोरखपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन ने इन सुविधाओं को शुरू करने के लिए शासन को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।

मंडलीय अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1500 से अधिक मरीजों का हुजूम उमड़ता है। पर्ची कटाने के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में कई बार मरीजों को मायूस होना पड़ता है। वर्तमान में अस्पताल में अस्थमा, शुगर और चेस्ट रोग विशेषज्ञ तो तैनात हैं, लेकिन फेफड़ों की जांच के लिए जरूरी “पीएफटी (PFT) मशीन” उपलब्ध नहीं है। इसके चलते मरीजों को निजी सेंटरों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। अब अस्पताल प्रशासन ने शासन से पीएफटी मशीन की मांग की है।

ENT विभाग को मिलेगा हाई-टेक बैकअप
खबर है कि ईएनटी विभाग के लिए भी आधुनिक उपकरणों की डिमांड भेजी गई है। इसमें माइक्रोस्कोप, एंडोस्कोप, मॉनिटर और फेशियल सर्जरी से जुड़े जरूरी औजार शामिल हैं। सबसे बड़ी राहत उन मूकबधिर मरीजों के लिए होगी, जिन्हें दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने या जांच के लिए बनारस या गोरखपुर रेफर कर दिया जाता था। इन मशीनों के आने से आजमगढ़ में ही उनकी जांच संभव हो सकेगी।

DNB की पढ़ाई ने बढ़ाई उपकरणों की जरूरत
अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा का स्तर भी बढ़ रहा है। मंडलीय अस्पताल में डीएनबी (डिप्लोमा ऑफ नेशनल बोर्ड) की 13 सीटों पर दाखिले पूरे हो चुके हैं। इनमें मेडिसिन (3), सर्जरी (2), ऑर्थोपेडिक (2), ईएनटी (2), नेत्र विभाग (2) और इमरजेंसी के लिए 2 सीटें शामिल हैं। मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और बेहतर प्रशिक्षण के लिए भी इन आधुनिक उपकरणों का होना अनिवार्य है।

रेडियोलॉजिस्ट की कमी अब भी चुनौती
सुविधाएं बढ़ने के दावों के बीच एक कड़वी हकीकत यह भी है कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण एक्स-रे और सोनोग्राफी हफ्ते में सिर्फ तीन दिन ही हो पा रही है। हालांकि, पीपीपी मॉडल पर संचालित सीटी स्कैन की सुविधा सुचारू है, जहां रोजाना करीब 800 लोगों की जांच की जा रही है।

अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. एसी कन्नौजिया के मुताबिक, सभी विभागों से जरूरी उपकरणों की सूची मांगी गई थी, जिसके आधार पर शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मंजूरी मिलने के बाद मशीनें अस्पताल पहुंच जाएंगी।

आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या आपको लगता है कि केवल मशीनें मंगा लेने से आजमगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर जाएगी, या डॉक्टरों और टेक्नीशियनों की कमी को दूर करना ज्यादा जरूरी है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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