आजमगढ़/वाराणसी: धर्म और आस्था की नगरी वाराणसी के रामनगर में चल रही विश्वप्रसिद्ध रामलीला से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। आजमगढ़ से हाथी लेकर रामलीला में शामिल होने गए महावत घपलू नट की इलाज के दौरान मौत हो गई। हाथी के कथित हमले में गंभीर रूप से घायल महावत ने जिंदगी और मौत के बीच लंबी जंग लड़ी, लेकिन अंततः वह हार गया। इस घटना के बाद मृतक के गांव में मातम पसरा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र के असवनिया गांव निवासी यशवंत सिंह उर्फ शिवली सिंह के हाथी की देख-रेख तहबरपुर थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव निवासी घपलू नट उर्फ छपलू (पुत्र जन्ना नट) करता था। नवरात्र के दूसरे दिन घपलू हाथी को लेकर वाराणसी के रामनगर की रामलीला में शामिल होने गया था। बताया जा रहा है कि 18 अक्तूबर की सुबह करीब 10 बजे जब घपलू हाथी को नहलाने के लिए नदी की ओर ले जा रहा था, तभी अचानक हाथी ने आपा खो दिया।
सूंड से पटककर किया था लहूलुहान
आरोप है कि हाथी ने अचानक हमलावर होते हुए घपलू को अपनी सूंड से पकड़कर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया। वहां मौजूद अन्य महावतों ने कड़ी मशक्कत के बाद घपलू को हाथी के चंगुल से छुड़ाया। आनन-फानन में उसे वाराणसी के बीएचयू (BHU) अस्पताल में भर्ती कराया गया। 20 अक्तूबर को परिजन उसे आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल ले आए।
पैर काटना पड़ा, फिर भी नहीं बची जान
अस्पताल में इलाज के दौरान पता चला कि घाव में गंभीर संक्रमण फैल चुका है। डॉक्टरों ने संक्रमण को रोकने के लिए 21 अक्तूबर को घपलू का बायां पैर कूल्हे के पास से काट दिया। इसके बावजूद संक्रमण पूरे शरीर में फैलता चला गया और 22 अक्तूबर की रात घपलू ने दम तोड़ दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
घपलू अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। उसके सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका था। मृतक का एक चार साल का बेटा है, जिसका नाम इसराइल है। विडंबना देखिए कि घपलू के छोटे भाई की शादी भी तय हो चुकी थी, लेकिन खुशियों के घर में अब मातम का सन्नाटा है। इस घटना ने पूरे विशुनपुर गांव को झकझोर कर रख दिया है।
पाठकों से सवाल: सार्वजनिक आयोजनों और मेलों में हाथियों जैसे विशालकाय जानवरों के शामिल होने पर सुरक्षा के क्या कड़े नियम होने चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
