Sat, Nov 7, 2026 Updated 07:47 AM IST
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आजमगढ़ में बच्चों की जान से खिलवाड़! 150 जर्जर स्कूलों में मंडरा रहा “मौत का साया”, फाइलों में फंसी नीलामी

1 hour पहले

आजमगढ़: जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूमों की जिंदगी इस वक्त बड़े खतरे में है। जनपद के करीब 150 परिषदीय स्कूलों में जर्जर हो चुके भवन किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि विभाग को इन “मौत के खंडहरों” की पूरी जानकारी है, लेकिन सरकारी कागजी कार्रवाई और तकनीकी पेच के चलते इनका ध्वस्तीकरण अटका हुआ है।

आजमगढ़ जिले में कुल 2706 परिषदीय स्कूल हैं, जिनमें ढाई लाख से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से 150 स्कूलों के भवनों को काफी समय पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है। खंड शिक्षा अधिकारियों ने इन भवनों के ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव बनाकर ग्राम स्तर पर भेज दिया था और इनकी आंगणन रिपोर्ट भी तैयार हो गई थी। लेकिन अब मामला “मूल्यांकन” की सुई पर आकर अटक गया है।

क्यों नहीं हो रही नीलामी?
सूत्रों के अनुसार, तकनीकी समिति द्वारा इन जर्जर भवनों का मूल्यांकन (कीमत) बहुत अधिक तय कर दिया गया है। अधिक कीमत होने के कारण कोई भी ठेकेदार नीलामी की प्रक्रिया में रुचि नहीं ले रहा है। नतीजा यह है कि ये जर्जर इमारतें जस की तस खड़ी हैं और स्कूल परिसर में खेल रहे बच्चों के लिए “टाइम बम” बनी हुई हैं।

रस्सी के भरोसे मासूमों की सुरक्षा!
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि इन खतरनाक इमारतों को गिराने के बजाय, बीएसए के निर्देश पर प्रधानाध्यापकों ने इन्हें महज “रस्सी” से बांधकर घेर दिया है। विभाग का मानना है कि रस्सी बांधने से बच्चे इन खंडहरों के पास नहीं जाएंगे। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या एक कमजोर रस्सी इन भारी-भरकम जर्जर दीवारों को गिरने से रोक पाएगी? लंच ब्रेक के दौरान जब बच्चे मैदान में खेलते हैं, तब हमेशा किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?
डीसी निर्माण अनिल कुमार सिंह ने बताया कि निष्प्रोज्य घोषित किए गए इन भवनों का मूल्यांकन अधिक होने के कारण नीलामी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। वहीं, बीएसए राजीव पाठक का कहना है कि 150 स्कूलों में जर्जर भवनों को चिन्हित कर सारी प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है, लेकिन उच्च मूल्यांकन के कारण मामला अटका है। नीलामी के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या मासूमों की सुरक्षा से बढ़कर सरकारी खजाने का मूल्यांकन है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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