आजमगढ़। जिला कारागार की सुरक्षा और सरकारी खर्च को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। अब जेल में बंद ट्रायल वाले बंदियों को पेशी के लिए बार-बार अदालतों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आजमगढ़ जिला जेल में अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) रूम बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिसे आगामी नवंबर महीने से विधिवत संचालित करने की तैयारी है।
बचेगा सरकारी पैसा और पुलिस की मेहनत:
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में आजमगढ़ जेल से रोजाना लगभग 120 से 130 बंदियों को तीन बड़ी गाड़ियों के जरिए न्यायालय ले जाया जाता है। इन बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 80 से अधिक पुलिसकर्मियों की फौज तैनात करनी पड़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में ईंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी होने से यह भारी-भरकम धनराशि बचेगी और पुलिसकर्मी अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी में अपना योगदान दे सकेंगे।
सुरक्षा का अभेद्य किला बनेगा जेल परिसर:
जेल प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में जेल में ट्रायल के 464 और रिमांड के 407 बंदी निरुद्ध हैं। अब तक केवल रिमांड वाले बंदियों की ही ऑनलाइन पेशी की व्यवस्था थी, लेकिन अब ट्रायल बंदियों के लिए भी दूसरा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम तैयार कर लिया गया है। इससे बंदियों के भागने या पेशी के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की आशंका शून्य हो जाएगी।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है नया वीसी रूम:
इस नए सेटअप में हर कोर्ट के बंदियों के लिए अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं। बंदियों के बैठने के लिए एक व्यवस्थित प्रतीक्षालय (Waiting Room) भी तैयार किया गया है। नियम के मुताबिक, जिस कोर्ट में जिस बंदी की पेशी होगी, केवल उसे ही केबिन के अंदर प्रवेश दिया जाएगा, शेष बंदी प्रतीक्षालय में अपनी बारी का इंतजार करेंगे। न्यायालय की विशेष मांग या अत्यंत आवश्यकता होने पर ही किसी बंदी को भौतिक रूप से कोर्ट ले जाने की अनुमति दी जाएगी।
जेल अधीक्षक सत्यप्रकाश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि “वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में सभी जरूरी उपकरण लगाए जा चुके हैं। नवंबर माह से इसे पूरी तरह क्रियाशील कर दिया जाएगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।”
आजमगढ़ टाइम्स की विशेष टिप्पणी: तकनीक के इस दौर में जेल प्रशासन का यह कदम न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी क्रांतिकारी साबित होगा।
पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि सभी अदालती कार्यवाहियों को इसी तरह डिजिटल कर देना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
