आजमगढ़: जिले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए शस्त्र लाइसेंस हासिल करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से तीन शस्त्र लाइसेंसों को निलंबित कर दिया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के इस कड़े आदेश के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। यह पूरा मामला निजामाबाद थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ कथित तौर पर फर्जी पते और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे बांदा और मुंबई के रहने वाले लोगों ने आजमगढ़ से अपनी बंदूकों के लाइसेंस जारी करवा लिए थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में हुई इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि आरोपियों ने न केवल फर्जी पते पर लाइसेंस बनवाए, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड (SIR) में भी हेराफेरी कर अपने नाम दर्ज करवा लिए। इस मामले में पुलिस ने बांदा के रहने वाले और वर्तमान में मुंबई निवासी मोहम्मद अबरार को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जाने वाला मिर्जा अयाज बेग अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
इनके लाइसेंस हुए निलंबित:
जिलाधिकारी ने लोक शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 16 अक्टूबर 2026 को निलंबन की कार्रवाई की। जिन शस्त्रों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
1. मिर्जा अयाज बेग (निवासी मिर्जापुर, निजामाबाद): इनकी .32 बोर पिस्टल और .315 बोर राइफल का लाइसेंस।
2. मोहम्मद इबराक खान (निवासी मिर्जापुर, निजामाबाद/वर्तमान पता ओशिवारा, मुंबई): इनके .32 बोर रिवॉल्वर का लाइसेंस।
इस फर्जीवाड़े में एक अन्य आरोपी मोहम्मद शाहिद की भी तलाश की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, शाहिद को पकड़ने के लिए पुलिस की एक टीम मुंबई भी भेजी गई थी, लेकिन वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि निजामाबाद थाने के कुछ पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा मुमकिन नहीं था।
पुलिस के अनुसार, निजामाबाद थाने में इस संबंध में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। मुकदमा संख्या 177/2026 में मिर्जा अयाज बेग के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि मुकदमा संख्या 245/2026 में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आयुध अधिनियम की धाराओं के तहत जांच जारी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फर्जीवाड़े से हासिल किए गए हथियारों को तुरंत पुलिस अभिरक्षा में जमा कराया जाए।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के मुंबई में रहने वाले लोग आजमगढ़ से फर्जी लाइसेंस बनवा सकते हैं? इस भ्रष्टाचार पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं।
