आजमगढ़। शहर से सटे छतवारा में करीब 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुई मंडलस्तरीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला में आखिरकार जांच कार्य शुरू हो गया है। सितंबर माह में विभाग को हैंडओवर की गई इस अत्याधुनिक लैब का औपचारिक उद्घाटन कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस प्रयोगशाला में आजमगढ़ मंडल के अपने जिलों से लिए गए खाद्य नमूनों की लीगल जांच नहीं की जाएगी। यहां के नमूनों को पहले की तरह ही जांच के लिए आगरा भेजा जाएगा, जबकि यहां दूसरे मंडलों के सैंपल जांचे जाएंगे।
प्रयोगशाला में खाद्य और औषधि दोनों विभागों की जांच के लिए कुल 36 अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। लैब की शुरुआत के पहले ही दिन से दवाओं की लीगल और फॉरेंसिक दोनों तरह की जांच शुरू कर दी गई है। ड्रग लैब के संचालन के लिए एक वरिष्ठ विश्लेषक (सीनियर एनालिस्ट) के साथ 20 कनिष्ठ विश्लेषक (जूनियर एनालिस्ट) अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इसके विपरीत, खाद्य प्रयोगशाला (फूड लैब) में फिलहाल सिर्फ सर्विलांस (फॉरेंसिक) जांच ही शुरू हो सकी है। खाद्य पदार्थों की लीगल यानी कानूनी जांच अटकने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, खाद्य प्रयोगशाला को अभी तक भारत सरकार की संस्था “एनएबीएल” (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज) से प्रमाण पत्र नहीं मिला है। दूसरा, फूड लैब के लिए 20 जूनियर एनालिस्टों की भर्ती प्रक्रिया न्यायालय में लंबित होने के कारण तैनाती नहीं हो सकी है, हालांकि यहां 2 सीनियर एनालिस्ट काम संभाल रहे हैं।
डाक के माध्यम से सैंपल आगरा भेजने और वहां से रिपोर्ट आने में 1 से 2 महीने तक का लंबा समय लग जाता है। उदाहरण के तौर पर, जिले में 10 अगस्त को लड्डू, खोवा, पेड़ा और गुलाब जामुन के जो नमूने लिए गए थे, उनकी जांच रिपोर्ट लगभग दो महीने बाद 6 अक्टूबर को प्राप्त हुई। नियम के मुताबिक लैब को 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होती है। इस प्रशासनिक देरी की वजह से मिलावटखोरों पर तुरंत शिकंजा कसने और उन पर जुर्माना या सजा की कार्रवाई करने में काफी दिक्कत आती है।
इस बीच, जिले में खाद्य कारोबार का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025-26 में जहां 15,478 दुकानें पंजीकृत थीं और 1,486 दुकानों के पास लाइसेंस था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा बढ़कर 16,284 पंजीकरण और 1,597 लाइसेंस तक पहुंच गया है। इसके साथ ही बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक तराजू और बाट-माप में घटतौली की कथित शिकायतों पर बाट-माप विभाग ने जांच तेज कर दी है। वर्ष 2026-27 में रिकॉर्ड 7,220 दुकानों का सत्यापन किया गया। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर व्यापारियों पर 2,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।
पूरे मामले पर आजमगढ़ मंडल के अपर आयुक्त खाद्य (प्रथम) श्रवण कुमार मिश्रा का कहना है कि “प्रयोगशाला में जांच शुरू कर दी गई है। जैसे ही एनएबीएल सर्टिफिकेट प्राप्त होगा और जूनियर एनालिस्टों की उपलब्धता होगी, 1 जनवरी से खाद्य पदार्थों की लीगल जांच भी पूर्ण रूप से शुरू कर दी जाएगी।” वहीं अपर आयुक्त खाद्य (द्वितीय) सुशील कुमार मिश्रा ने बताया कि “छापेमारी के साथ व्यापारियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है और मिलावट की पुष्टि होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
पाठकों से सवाल: 25 करोड़ रुपये की लागत से बनी लैब होने के बावजूद आजमगढ़ के सैंपल जांच के लिए आगरा भेजे जाना, क्या प्रशासनिक लापरवाही है? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं!
