Sat, Nov 7, 2026 Updated 02:17 PM IST
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आजमगढ़ में बड़ा फर्जीवाड़ा: होमगार्ड रनर ने उप निदेशक के नाम पर बांटे 26 फर्जी नियुक्ति पत्र, “साहब” बनकर बेरोजगारों के भविष्य से खेला!

2 weeks पहले

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सरकारी नौकरी के नाम पर बेरोजगारों की भावनाओं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आजमगढ़ टाइम्स की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि एक होमगार्ड रनर ने कथित तौर पर उप निदेशक पंचायत के फर्जी हस्ताक्षर और सरकारी मुहर का इस्तेमाल कर दर्जनों युवक-युवतियों को फर्जी नियुक्ति पत्र बांट दिए।

पूरा मामला तब खुला जब गुरुवार की शाम साधना नाम की एक युवती नियुक्ति पत्र लेकर मंडलीय विकास भवन स्थित उप निदेशक पंचायत के कार्यालय पहुंची। युवती के हाथ में मौजूद “सरकारी आदेश” को देखते ही कार्यालय के कर्मचारियों के होश उड़ गए, क्योंकि विभाग की ओर से ऐसी कोई नियुक्ति जारी ही नहीं की गई थी। जांच में पता चला कि आरोपी ने कथित तौर पर करीब 26 बेरोजगारों को इसी तरह के फर्जी दस्तावेज थमाकर उन्हें ठगा है।

कौन है इस जालसाजी का मुख्य चेहरा?
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल का मुख्य आरोपी रितेश मणि त्रिपाठी बताया जा रहा है। रितेश वर्तमान में रौनापार थाने में तैनात है और मंडलीय विकास भवन स्थित जिला होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय में रनर के रूप में कार्यरत है। आरोप है कि उसने अपने पद और रसूख का गलत इस्तेमाल कर उप निदेशक पंचायत के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए।

पूछताछ में कबूला अपना गुनाह
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप निदेशक पंचायत ने 23 अक्टूबर को ही संयुक्त विकास आयुक्त रामबाबू त्रिपाठी को इसकी सूचना दी थी। इसके बाद जब आरोपी रितेश मणि को बुलाकर संयुक्त विकास आयुक्त के कमरे में पूछताछ की गई, तो उसने कथित तौर पर अपना लिखित बयान देते हुए अपनी गलती स्वीकार कर ली। आरोपी ने माना है कि उसने ही ये फर्जी आदेश जारी किए थे।

पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी दांव-पेंच
उप निदेशक पंचायत कार्यालय की ओर से शुक्रवार को ही सिधारी थाने में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई थी। हालांकि, शिक्षक एमएलसी चुनाव की व्यस्तता के कारण पुलिस ने शनिवार को मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। सिधारी थानाध्यक्ष विनय कुमार का कहना है कि “तहरीर प्राप्त हुई है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है, जांच के बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या आपको लगता है कि सरकारी विभागों में बैठे ऐसे “भीतरघाती” ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं? ऐसे जालसाजों को क्या सजा मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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