आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सठियांव इलाके में विभाग के कर्मचारियों ने “जादुई” फुर्ती दिखाते हुए बिना बिजली कनेक्शन, बिना खंभे और बिना तार के ही आंगनबाड़ी केंद्र पर पोस्टपेड मीटर टांग दिया है। इस अजीबोगरीब कारनामे के बाद अब कथित तौर पर अवैध वसूली का भी आरोप लग रहा है।
पूरा मामला सठियांव के एक आंगनबाड़ी केंद्र का है। जानकारी के मुताबिक, इस केंद्र पर अभी तक बिजली विभाग की ओर से न तो कोई औपचारिक कनेक्शन दिया गया है और न ही वहां तक बिजली के तार या खंभे पहुंचे हैं। इसके बावजूद, कुछ दिन पहले विभाग के कथित कर्मचारी वहां पहुंचे और दीवार पर पोस्टपेड मीटर लगा दिया। जब आंगनबाड़ी कार्यकत्री ने बिना कनेक्शन मीटर लगाने का कारण पूछा, तो कर्मियों ने कथित तौर पर “ऊपर से आदेश” होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
सुविधा शुल्क मांगने का गंभीर आरोप
आरोप है कि मीटर लगाने के बाद संबंधित बिजलीकर्मी वहां “सुविधा शुल्क” (रिश्वत) की मांग करने लगा। मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा; गुरुवार को इसी तरह की एक और घटना सठियांव प्रथम प्राथमिक विद्यालय में भी देखने को मिली। बताया जा रहा है कि वहां भी एक व्यक्ति खुद को विभाग से जुड़ा बताकर पोस्टपेड मीटर लगाने पहुंच गया। उसने दावा किया कि उसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय से स्कूल की सूची मिली है। स्कूल प्रशासन का आरोप है कि मीटर लगाने के नाम पर वह व्यक्ति भी रुपयों की मांग कर रहा था।
विभाग की साख पर सवाल
बिना बुनियादी ढांचे (तार और खंभे) के मीटर लगा देना न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि यह विभाग के भीतर चल रहे किसी बड़े खेल की ओर भी इशारा करता है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या यह सरकारी आंकड़ों में कागजी खानापूर्ति का हिस्सा है या फिर सीधे-सीधे जनता और संस्थानों से धन उगाही का नया तरीका? फिलहाल, इस मामले ने बिजली विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
आजमगढ़ टाइम्स की राय: क्या आपको लगता है कि बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह की धांधली संभव है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
