आजमगढ़ जिले में 220 ईसीसीई (ECCE) एजुकेटरों की संविदा भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और धांधली के आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने साक्षात्कार में शासनादेश और तय मानकों की अनदेखी की पुष्टि होने के बाद पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। अब अभ्यर्थियों का चयन नए सिरे से मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी में कराया जाएगा।
मंत्री तक पहुंची थी अवैध वसूली की शिकायत:
इस पूरे मामले की शुरुआत 9 अक्टूबर को हुई, जब श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर के पास भर्ती में अनियमितता की गंभीर शिकायत पहुंची। मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय की ओर से 30 अक्टूबर को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को भेजे गए पत्र के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईसीसीई एजुकेटर पद पर चयन के दौरान शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर अवैध वसूली की गई। शिकायतकर्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता कंपनी का टेंडर निरस्त करने की मांग की थी।
तीन सदस्यीय समिति ने खोली पोल:
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम रविंद्र कुमार ने तीन अधिकारियों की जांच समिति गठित की थी। इसमें मुख्य कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी आरडी यादव और जिला सूचना विज्ञान अधिकारी चंदन यादव को शामिल किया गया था। जांच टीम ने सेवा प्रदाता कंपनी से इंटरव्यू पैनल के सदस्यों की योग्यता, विभागीय प्रतिनिधि की मौजूदगी, रैंडमाइजेशन सूची और चयनित अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि साक्षात्कार के दौरान शासनादेश के नियमों का पालन नहीं किया गया था।
नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी: डीएम
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कड़े शब्दों में कहा कि “भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। जांच में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आने पर पुराना इंटरव्यू रद्द किया गया है। नए सिरे से होने वाली चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
क्या है ईसीसीई एजुकेटर का काम?
ईसीसीई यानी “अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन” के तहत 3 से 6 वर्ष तक के छोटे बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाती है। इन एजुकेटरों का मुख्य काम बच्चों की भाषा, शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षमता का विकास करना है ताकि उन्हें प्राथमिक विद्यालय के माहौल के लिए तैयार किया जा सके।
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या आउटसोर्सिंग (कंपनी) के जरिए होने वाली संविदा भर्तियों में भ्रष्टाचार की गुंजाइश ज्यादा रहती है? क्या ऐसी भर्तियों की कमान सीधे सरकारी आयोगों को दी जानी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!
