आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। जनपद के सबसे चर्चित और सनसनीखेज रुदरी दोहरे हत्याकांड में करीब 19 साल के लंबे कानूनी इंतजार के बाद आखिरकार न्याय की घड़ी करीब आ गई है। रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव में वर्ष 2007 में विजयादशमी के पावन पर्व पर हुए इस खूनी खेल में आजमगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में वर्तमान रानी की सराय ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत कई आरोपी कटघरे में हैं।
दशहरे के दिन गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा था गांव: बता दें कि 21 अक्टूबर 2007 को जमीन के विवाद और कथित वर्चस्व की लड़ाई में शिक्षक तालुकदार सिंह और उनके सगे भाई ठेकेदार पारस सिंह की सरेआम गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस ताबड़तोड़ गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। आरोप है कि हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए लाइसेंसी राइफल, रिवॉल्वर और अवैध तमंचों का खुलेआम इस्तेमाल किया था।
10 बार हाईकोर्ट और 3 बार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची कानूनी जंग: मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह के अनुसार, इस केस की राह कतई आसान नहीं रही। मुकदमे को स्थानांतरित कराने (ट्रांसफर) की नीयत से कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिशें की गईं। मामला 10 बार इलाहाबाद हाईकोर्ट और 3 बार देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक पहुंचा। अंततः फास्ट ट्रैक कोर्ट में 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। निष्पक्ष सुनवाई के दौरान एक आरोपी राधेश्याम सिंह की मौत भी हो चुकी है, जबकि क्रॉस केस से जुड़े मामले में भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
इन रसूखदारों पर टिकी हैं निगाहें: इस दोहरे हत्याकांड के मुकदमे में ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह, राजेश सिंह, बलवंत सिंह, चुन्नू उर्फ रणजीत, छोटू, पंकज सिंह, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश सिंह और सिद्धार्थ सिंह समेत कई लोग आरोपी के रूप में नामजद हैं। अब देखना यह होगा कि अदालत का फैसला आने पर 19 साल से न्याय की आस लगाए पीड़ित परिवार को क्या राहत मिलती है।
आजमगढ़ टाइम्स सवाल: क्या किसी आपराधिक मामले के फैसले में 19 साल का लंबा वक्त लगना पीड़ित परिवार के साथ न्याय है? अदालत के इस लंबित चक्र पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपनी बात बेबाकी से रखें।


