आजमगढ़। जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष (इमरजेंसी ओटी) में जब तड़पते मरीज की देखभाल के लिए कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला, तो बाहर खड़े एक निजी एंबुलेंस चालक ने खुद ही “डॉक्टर” की भूमिका निभाते हुए मरीज का इलाज शुरू कर दिया और उसे ड्रिप लगा दी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार को इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ। यह वीडियो जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि रात के समय स्ट्रेचर पर एक मरीज दर्द से तड़प रहा था। आरोप है कि उस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ अपने स्थान से गायब थे। ऐसे में बाहर मौजूद एक निजी एंबुलेंस चालक मरीज को ओटी कक्ष के अंदर ले गया और खुद ही उसे ड्रिप चढ़ाने लगा।
हैरानी की बात यह है कि नियमों के मुताबिक इमरजेंसी कक्ष में डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों को मिलाकर करीब 10 स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी रहती है। ऐसे में सभी जिम्मेदार कर्मचारियों का एक साथ नदारद रहना मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण पर आजमगढ़ जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रामकेवल पासवान ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और इसकी गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इमरजेंसी इंचार्ज और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
आजमगढ़ टाइम्स की पाठकों से अपील/सवाल: क्या सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की इस तरह की लापरवाही पर महज “जांच” का दिलासा काफी है या दोषियों पर तत्काल निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी बेबाक राय कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करें।
