आजमगढ़। मंडल में सरकारी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालने और जनहित के कार्यों में ढिलाई बरतने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मंडलायुक्त का कड़ा रुख देखने को मिला है। बुधवार को सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की ग्रेडिंग और रैंकिंग में खराब प्रदर्शन पाए जाने पर मंडलायुक्त विवेक ने मंडल के चार वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का सख्त फरमान सुनाया है। इसके साथ ही लापरवाही के जिम्मेदार अफसरों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
समीक्षा बैठक के दौरान जिन चार अधिकारियों पर गाज गिरी है, उनमें कृषि योजनाओं में लक्ष्य से पिछड़ने पर उप कृषि निदेशक (आजमगढ़), दुग्ध मूल्य भुगतान की कार्ययोजना शासन को न भेजने पर मंडलीय दुग्ध विकास अधिकारी, दिव्यांगजनों को पेंशन योजना से आच्छादित न करने पर उप निदेशक दिव्यांगजन (संजय मिश्रा) और विभागीय कार्यों में लापरवाही पर उप निदेशक (अल्पसंख्यक एवं समाज कल्याण) शामिल हैं। मंडलायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है।
बैठक में मंडलायुक्त ने शिक्षा और स्वास्थ्य महकमे को भी कड़े निर्देश जारी किए। मंडल के तीनों जनपदों के डीआईओएस (DIOS) को ताकीद की गई कि आगामी यूपी बोर्ड परीक्षा के केंद्रों का चयन पूरी सतर्कता से करें और निजी कॉलेजों को केंद्र बनाने से परहेज करें। वहीं, स्वास्थ्य विभाग को हिदायत दी गई कि अवैध अस्पतालों, झोलाछाप डॉक्टरों और निजी एंबुलेंसों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें सीज किया जाए। नियम विरुद्ध चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, शत-प्रतिशत पात्र लोगों की फैमिली आईडी बनाने और सहकारी समितियों की हड़ताल पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है। इस समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी रवींद्र कुमार, आनंद वर्धन, अपर आयुक्त प्रमोद पांडेय और तीनों जिलों के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सहित तमाम विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
आपकी राय: क्या अफसरों का वेतन रोकने जैसी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई से जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक बेहतर तरीके से पहुंच पाएगा? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं।
