आजमगढ़। जनपद में अवैध और मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. एनआर वर्मा के कड़े निर्देशों के बाद जिले के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। शनिवार को विभाग की टीम ने ठेकमा और जीवली क्षेत्र में छापेमारी कर एक अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया, जबकि तीन अन्य को अंतिम चेतावनी के साथ नोटिस थमाया है।
‘जनता हॉस्पिटल’ पर जड़ा ताला: ठेकमा स्थित ‘जनता हॉस्पिटल’ पर विभाग की गाज सबसे पहले गिरी। डिप्टी सीएमओ और निजी चिकित्सा प्रतिष्ठानों के नोडल अधिकारी डॉ. मोहनलाल के नेतृत्व में पहुंची टीम को अस्पताल का कोई वैध पंजीकरण (Registration) नहीं मिला। इतना ही नहीं, वहां तैनात कथित चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता और अर्हता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में टीम ने अस्पताल की ओपीडी, आईपीडी और मुख्य द्वार को सील कर दिया है।
आयुष के नाम पर एलोपैथी का खेल: जांच के दौरान जीवली इलाके में संचालित ‘आकाश चाइल्ड केयर’ और ‘आरएम हेल्थ केयर’ पूरी तरह अपंजीकृत पाए गए। वहीं ठेकमा के ‘रॉयल चिकित्सालय’ में एक अलग ही खेल उजागर हुआ। यह अस्पताल आयुष पद्धति (Ayush) के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन मौके पर कथित तौर पर धड़ल्ले से एलोपैथिक दवाओं का उपयोग किया जा रहा था, जिसके लिए अस्पताल के पास कोई अनुमति नहीं थी।
72 घंटे का अल्टीमेटम: स्वास्थ्य विभाग ने इन तीनों चिकित्सा संस्थानों के संचालकों को नोटिस जारी कर 3 दिन का समय दिया है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर वैधानिक दस्तावेज और मानक पूरे नहीं किए गए, तो इन अस्पतालों को भी सील कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जारी रहेगा अभियान: स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जिले में बिना पंजीकरण और अधूरे मानकों के चल रहे नर्सिंग होम और क्लीनिकों के खिलाफ यह अभियान थमेगा नहीं। औचक निरीक्षण के जरिए ऐसे ‘मौत के अड्डों’ को चिन्हित कर बंद कराया जाएगा।
पाठकों से सवाल: क्या आपको लगता है कि आजमगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अवैध अस्पतालों पर प्रशासन की यह सख्ती काफी है, या इसके पीछे किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
