आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करने वाली खबर सामने आई है। बरदह थाने में न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुके एक पीड़ित युवक ने कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ (जहर) खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। युवक का आरोप है कि पुलिस उसके मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जिससे परेशान होकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
पूरा मामला बरदह थाना क्षेत्र के जीवली गांव का है। यहाँ के निवासी वतन राय का अपने विपक्षी से लंबे समय से भूमि विवाद चल रहा है। वतन राय का आरोप है कि बीते 10 अक्टूबर को विपक्षी ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें, उनकी पत्नी व बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया। इस मारपीट में परिवार के लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया था।
“तीन हफ्ते बीत गए, पर पुलिस सोती रही”
पीड़ित युवक का कहना है कि उसने घटना के तुरंत बाद पुलिस को लिखित तहरीर दी थी, लेकिन तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसी बात से आहत होकर वतन राय शुक्रवार दोपहर दो गिलास में कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ लेकर थाने पहुँच गया और उसे पी लिया। थाने के भीतर युवक द्वारा जहर खाने की खबर से पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।
पुलिस अधिकारियों को ठहराया जिम्मेदार
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में युवक यह कहते सुना जा रहा है कि यदि उसकी मौत होती है, तो इसके लिए पुलिस के उच्चाधिकारी और थाना प्रभारी जिम्मेदार होंगे। हालांकि, “आजमगढ़ टाइम्स” इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
क्या कहती है पुलिस?
मामले पर सफाई देते हुए बरदह थानाध्यक्ष चंद्रदीप कुमार ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान पीड़ित की तहरीर प्राप्त हुई थी। पुलिस का दावा है कि दोनों पक्षों को बुलाकर समझाने का प्रयास किया गया था और उन्हें घर भेज दिया गया था। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई है।
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या जमीनी विवादों में पुलिस की लेट-लतीफी आम आदमी को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर रही है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
