आजमगढ़/अयोध्या: एक तरफ जहां भव्य दीपोत्सव के दीयों की रोशनी से अयोध्या जगमगा रही थी, वहीं दूसरी तरफ आजमगढ़-अयोध्या मार्ग पर अव्यवस्था का अंधेरा छाया रहा। दीपोत्सव के दौरान शासन-प्रशासन के वीआईपी रूट डायवर्जन के सख्त आदेशों ने आम यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों की सांसें अटका दीं। दोपहर बाद से ही अयोध्या शहर के भीतर भारी वाहनों और रोडवेज बसों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसका सीधा असर आजमगढ़ और आसपास के इलाकों में लौटने वाले लोगों पर पड़ा।
प्रशासनिक पाबंदी के चलते दर्शन नगर कस्बा, मंगल पांडे चौराहा, देवकाली तिराहा, शाहनवाजपुर बाजार और बाकरगंज में सैकड़ों की संख्या में मुसाफिर घंटों सड़क किनारे असहाय खड़े रहे। त्योहार की छुट्टियों में अपने घर लौट रहे कामकाजी लोग देर रात 10 बजे तक बसों के इंतजार में भटकते नजर आए।
आजमगढ़ टाइम्स की पड़ताल में प्रशासनिक बदइंतजामी का दर्द झेल रहे लोगों का दर्द छलक पड़ा। दर्शन नगर चौराहे पर फंसे भीटी निवासी 45 वर्षीय रामकेवल यादव ने बताया कि वे सुबह काम के सिलसिले में अकबरपुर गए थे। शाम 6 बजे से ही वे बस का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अयोध्या की तरफ से कोई सवारी नहीं आ रही थी। उन्होंने रोष जताते हुए कहा, “छोटे-छोटे बच्चे घर पर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यहां सड़क पर खड़े रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।”
वहीं देवकाली तिराहे पर अपने दो छोटे बच्चों के साथ फंसी सुल्तानपुर की 38 वर्षीया सुनीता देवी ने बताया कि वे परिवार के साथ दीपोत्सव देखने आई थीं। दीपोत्सव खत्म होने के बाद जब घर लौटने की बारी आई, तो दूर-दूर तक कोई साधन नहीं मिला। सुनीता देवी का कहना था कि प्रशासन को वीआईपी सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता और छोटे बच्चों की सहूलियत का भी ध्यान रखना चाहिए था।
छात्रों और स्थानीय व्यापारियों पर भी इस रूट डायवर्जन की गाज गिरी। शाहनवाजपुर में फंसे छात्र विकास पांडे ने बताया कि वे अयोध्या स्थित अपने कॉलेज से पढ़ाई खत्म करके लौट रहे थे, लेकिन पिछले 3 घंटे से यातायात ठप होने के कारण रास्ते में ही फंसे रहे। दूसरी ओर बाकरगंज के स्थानीय दुकानदार मोहम्मद शमीम का कहना था कि रूट ब्लॉक होने के कारण त्योहार के दिन न तो ग्राहक दुकानों तक पहुंच पाए और न ही दुकान के कर्मचारी काम पर आ सके।
बसों का परिचालन पूरी तरह ठप होने के कारण दूर-दराज से आए कई श्रद्धालु गोद में सामान और बच्चों को उठाए कई किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर दिखे। पीड़ित यात्रियों का साफ तौर पर आरोप है कि प्रशासन वीआईपी प्रोटोकॉल में इतना व्यस्त हो गया कि आम नागरिकों के लिए किसी भी तरह के वैकल्पिक साधनों की व्यवस्था करना मुनासिब नहीं समझा गया। स्थानीय जनता ने अब मांग की है कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान आम यात्रियों के लिए समानांतर रूट और गाड़ियों की उचित व्यवस्था की जाए।
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: क्या वीआईपी आयोजनों और प्रोटोकॉल के नाम पर आम जनता, महिलाओं और बच्चों को इस तरह सड़कों पर बेबस छोड़ देना जायज है? क्या प्रशासन को ऐसे मौकों पर आम यात्रियों के लिए भी पुख्ता वैकल्पिक इंतजाम नहीं करने चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करें।
