Sat, Nov 7, 2026 Updated 08:41 PM IST
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आजमगढ़ में ‘अर्णव’ तूफान का तांडव: खेतों में बिछ गई सोने जैसी धान की फसल, लागत बढ़ने से संकट में अन्नदाता!

1 week पहले

आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। जनपद के मौसम में अचानक आए बदलाव और ‘अर्णव’ तूफान के प्रभाव ने क्षेत्र के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मुहम्मदपुर ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों में देर रात चली तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। खून-पसीने से सींची गई फसल को यूं बर्बाद होता देख किसानों के सामने अब बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुहम्मदपुर ब्लॉक के गंभीरपुर, रानीपुर रजमो, विषया, बसीरहा और अरारा समेत आसपास के इलाकों में कुदरत की इस मार का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच हुई रुक-रुक कर बारिश से खेतों में पहले से ही जलजमाव और नमी बनी हुई थी, जिससे धान के पौधों की जड़ें कमजोर हो चुकी थीं। इसके बाद रात में चली आंधी नुमा हवाओं ने पकी-पकाई फसल को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।

सड़ने का डर और कटाई की दोगुनी लागत:
खेतों में पानी भरा होने के कारण धान की बालियां अब मिट्टी और पानी के सीधे संपर्क में हैं। इससे बालियों के सड़ने और उनमें दोबारा अंकुरण (दाने फूटने) का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, जमीन पर आड़ी पड़ी फसल की मशीनों (हार्वेस्टर) से कटाई करना अब नामुमकिन सा हो गया है। किसानों को अब मजबूरी में महंगे मजदूरों को लगाकर हाथों से कटाई करानी पड़ेगी, जिससे फसल की लागत और मेहनत दोनों कई गुना बढ़ जाएगी।

आंसुओं में डूबे अन्नदाता:
क्षेत्र के प्रभावित किसानों संतोष उपाध्याय, हिमांशु यादव, संजय यादव, शशिकांत उपाध्याय, शैलेन्द्र उपाध्याय, देवराज यादव और अबू गानीम ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सालभर की मेहनत और गाढ़ी कमाई लगाने के बाद फसल अब पककर तैयार थी। किसान कटाई की तैयारियों में जुटे ही थे कि मौसम की इस मार ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। किसानों का कहना है कि धान की यह उपज ही उनके सालभर के आय और परिवार के गुजर-बसर का मुख्य सहारा है। यदि जल्द ही मौसम साफ न हुआ और खेतों से पानी नहीं निकला, तो बची-कुची उम्मीदें भी पानी में बह जाएंगी।

क्या कहते हैं जमीनी हालात?
आजमगढ़ का किसान इस समय प्राकृतिक आपदा और आर्थिक घाटे के दोहरे थपेड़े झेल रहा है। खेतों में तबाही का यह मंजर देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठ रहा है।

पाठकों से सवाल:
कुदरत की इस बेमौसम मार से बेहाल हुए आजमगढ़ के इन पीड़ित किसानों के लिए क्या राज्य सरकार और जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सर्वे कराकर मुआवजा राशि का ऐलान नहीं करना चाहिए? आपकी इस विषय पर क्या राय है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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