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सब्जी मंडी चौराहे पर ताले में कैद ‘ज्ञान का मंदिर’: आजमगढ़ का अग्रसेन पुस्तकालय बदहाल, क्या डिजिटल रंगत में लौटेगी पुरानी रंगत?

1 week पहले

आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। एक दौर था जब आजमगढ़ के सब्जी मंडी चौराहे पर स्थित अग्रसेन पुस्तकालय में सुबह से ही छात्र-छात्राओं का जमावड़ा लगता था। किताबों के पन्नों के बीच सपने बुनने वाले युवाओं की कतारें इस बात की गवाही देती थीं कि यह पुस्तकालय शहर के ज्ञान का प्रमुख केंद्र था। लेकिन आज प्रशासनिक उपेक्षा और देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक पुस्तकालय वर्षों से ताले में बंद पड़ा है और इसकी इमारत जर्जर होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।

स्थानीय लोगों और छात्रों के अनुसार, कभी इस पुस्तकालय से दर्जनों युवाओं ने अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने करियर को नई दिशा दी। लेकिन समय बीतने के साथ ही जिम्मेदारों ने इसकी ओर ध्यान देना बंद कर दिया, जिससे धीरे-धीरे इस ज्ञान मंदिर में सन्नाटा पसर गया। वर्तमान में इमारत की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि बिना रखरखाव के यह पूरी तरह ढहने के कगार पर पहुंच गई है।

हाल के दिनों में, स्थानीय स्तर पर अग्रवाल समाज द्वारा इस पुस्तकालय के पुनरुद्धार और इसे एक अत्याधुनिक ‘डिजिटल लाइब्रेरी’ के रूप में विकसित करने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। माना जा रहा है कि यदि इसे डिजिटल स्वरूप दिया जाता है, तो आजमगढ़ के प्रतियोगी छात्रों को एक बार फिर पढ़ाई का एक बेहतर माहौल मिल सकेगा। हालांकि, इस योजना पर आधिकारिक रूप से काम कब से शुरू होगा और इसकी जमीनी हकीकत क्या है, इसे लेकर अभी तक कोई स्थिति साफ नहीं हो सकी है।

शहर के जागरूक नागरिकों और छात्रों को अब भी इंतजार है कि कब अग्रसेन पुस्तकालय के दरवाजे फिर से खुलेंगे और यह नई डिजिटल सुविधाओं के साथ युवाओं के लिए उपलब्ध होगा। अब देखना यह होगा कि चर्चाओं का यह दौर धरातल पर कब तक उतर पाता है।

पाठकों से सवाल: क्या आजमगढ़ के सब्जी मंडी चौराहे पर स्थित इस ऐतिहासिक अग्रसेन पुस्तकालय को जल्द से जल्द डिजिटल लाइब्रेरी में तब्दील किया जाना चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें!

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