आजमगढ़। जनपद के पवई विकास खंड से भ्रष्टाचार और सिस्टम की लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी माथा पकड़ लेंगे। डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता के तमाम दावों के बीच पवई के टैनी गांव में मनरेगा जॉब कार्ड्स में भारी हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। यहाँ सरकारी कागजों पर उम्र का ऐसा ‘जादू’ चला है कि 70 साल के बुजुर्ग को महज 45 साल का ऊर्जावान युवा बना दिया गया है।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टैनी गांव में मनरेगा के तहत जारी किए गए जॉब कार्ड्स में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। आरोप है कि सरकारी वेबसाइट पर जो डेटा उपलब्ध है, उसमें कई जॉब कार्ड्स बिना फोटो के ही अपडेट कर दिए गए हैं। कथित तौर पर, यह पूरा खेल अपात्रों को लाभ पहुँचाने या सरकारी बजट में सेंधमारी करने के इरादे से खेला गया है।
हैरानी की बात यह है कि जिस बुजुर्ग की उम्र वास्तव में 70 वर्ष के आसपास है, सरकारी अभिलेखों और जॉब कार्ड पर उनकी उम्र महज 45 वर्ष दर्ज है। इस विसंगति ने विभाग की कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि बिना फोटो वाले जॉब कार्ड्स के जरिए मजदूरी के भुगतान में बड़ा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है, जिसमें निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टैनी गांव के सभी जॉब कार्ड्स की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो भ्रष्टाचार की एक लंबी फेहरिस्त सामने आ सकती है। फिलहाल, कागजों में उम्र घटाने का यह ‘चमत्कार’ पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आजमगढ़ टाइम्स का सवाल: सरकारी धन की इस बंदरबांट और कागजी हेरफेर के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं? क्या ऐसे मामलों में दोषियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
