आजमगढ़ (आजमगढ़ टाइम्स)। त्योहारों के सीजन में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के सरकारी दावों की पोल रविवार को खुद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के औचक निरीक्षण में खुल गई। सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा ने जब अचानक सठियांव, मुबारकपुर और पल्हनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में धावा बोला, तो महकमे में हड़कंप मच गया। सठियांव स्वास्थ्य केंद्र पर ड्यूटी रोस्टर के बावजूद कर्मचारियों के गायब मिलने पर सीएमओ ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने त्योहारों के दौरान होने वाली आपात स्थितियों, खासकर आग से झुलसने के मामलों को देखते हुए अस्पतालों के बर्न वार्ड, इमरजेंसी सेवाओं और जरूरी दवाओं के स्टॉक का बारीक जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं की स्थिति भी परखी। सीएमओ ने साफ हिदायत दी कि आपात स्थिति में सूचना मिलते ही मरीज तक तत्काल सहायता पहुँचनी चाहिए, इसमें किसी भी तरह की देरी क्षम्य नहीं होगी।
कार्रवाई का मुख्य केंद्र सठियांव CHC रहा, जहाँ तय ड्यूटी रोस्टर के बावजूद कई स्वास्थ्यकर्मी कथित तौर पर अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए। अस्पताल परिसर में पाई गई कमियों और कर्मचारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर नाराजगी जताते हुए सीएमओ ने केंद्र प्रभारी और अनुपस्थित कर्मचारियों से तत्काल स्पष्टीकरण (Show-cause notice) तलब करने के आदेश दिए हैं। वहीं, मुबारकपुर और पल्हनी CHC पर भी इमरजेंसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए डॉक्टरों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि ड्यूटी से गायब रहने, इमरजेंसी सेवाओं में बाधा आने या मरीजों के इलाज में टालमटोल की शिकायत मिली, तो संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ सीधी और कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
आजमगढ़ की जनता से सवाल: क्या आपको लगता है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की इस अनुपस्थिति पर केवल स्पष्टीकरण मांगना काफी है या ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर तुरंत निलंबन (Suspension) की कार्रवाई होनी चाहिए? नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर दें!
