आजमगढ़। जिला मुख्यालय के सिविल लाइन वार्ड स्थित रोडवेज बस स्टेशन इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आजमगढ़ टाइम्स की पड़ताल में सामने आया है कि रोडवेज परिसर किसी तबेले या गंदगी के ढेर से कम नजर नहीं आ रहा। यहाँ मूत्रालय का गंदा पानी खुलेआम परिसर में बह रहा है, जिससे न केवल भीषण दुर्गंध फैल रही है, बल्कि यात्रियों का वहां खड़ा होना भी दूभर हो गया है।
अफसरों की नाक के नीचे अव्यवस्था का अंबार: हैरानी की बात यह है कि जिस परिसर में गंदगी का यह तांडव मचा है, वहीं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) का कार्यालय और परिवहन निगम के तमाम आला अधिकारियों व कर्मचारियों के बैठने की जगह है। आरोप है कि अपनी नाक के नीचे फैली इस गंदगी और बहते गंदे पानी पर अधिकारियों की नजर तो पड़ती है, लेकिन वे इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।
सफर नहीं, सजा बन गया है रोडवेज आना: बस पकड़ने के लिए आने वाले यात्रियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिसर में नियमित सफाई नहीं होती। गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना हुआ है। यात्रियों को मजबूरन उसी बदबूदार और गंदे पानी के बीच से होकर बसों तक पहुंचना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जिससे रोडवेज की स्वच्छता के दावों की पोल खुल गई है।
क्या कहते हैं आंकड़े और स्थिति: 19 अक्टूबर 2026 की दोपहर तक रोडवेज परिसर की स्थिति जस की तस बनी हुई थी। दुर्गंध के कारण यात्रियों को रुमाल लगाकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या परिवहन निगम के अधिकारी किसी बड़ी बीमारी के फैलने का इंतजार कर रहे हैं या फिर यात्रियों की सुविधाओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं रह गया है?
आपकी क्या राय है? क्या आजमगढ़ रोडवेज की इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर उच्च अधिकारियों की लापरवाही जिम्मेदार है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।


