आजमगढ़: जिले की ग्रामीण विकास व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए आजमगढ़ की करीब 2300 ग्राम पंचायतों ने कथित तौर पर वित्तीय अनुशासन की धज्जियां उड़ा दी हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन पंचायतों ने अपने ‘स्वयं के आय स्रोत’ (OSR) के मद में एकत्रित 31.72 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि अब तक सरकारी खाते में जमा नहीं की है।
प्रशासनिक गलियारों में इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। नियमतः ग्राम पंचायतों को विभिन्न स्थानीय करों, शुल्कों और अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय को ओएसआर (OSR) खाते में जमा करना अनिवार्य होता है, ताकि उस धन का उपयोग गांव के विकास कार्यों में पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा सके। लेकिन, आजमगढ़ में स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। आरोप है कि इतनी बड़ी धनराशि होने के बावजूद संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे सरकारी खजाने में भेजने के बजाय कथित तौर पर रोक कर रखा है।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 2300 से अधिक ग्राम पंचायतें इस गंभीर लापरवाही की जद में हैं। 31.72 लाख रुपये का सरकारी खाते में न पहुंचना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह विकास कार्यों की गति को भी बाधित करता है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस धनराशि का हिसाब नहीं दिया गया और इसे जमा नहीं किया गया, तो संबंधित ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों पर कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की गाज गिरनी तय है।
पड़ताल में यह बात सामने आई है कि प्रशासन अब इन डिफॉल्टर पंचायतों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करने की तैयारी में है। जल्द ही इन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जा सकता है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर इतनी बड़ी रकम को सरकारी सिस्टम से बाहर रखा गया है? क्या यह महज एक प्रशासनिक चूक है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?
पाठकों की राय: क्या आपको लगता है कि ग्राम पंचायतों के बजट और खर्च का पूरा हिसाब ऑनलाइन सार्वजनिक होना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।


